सरोगेसी या सरोगेट विज्ञापन? विमल इलायची के विज्ञापन पर हाईकोर्ट का कड़ा हथौड़ा

इलायची बेचने के नाम पर करोड़ों युवाओं के फेफड़ों और सेहत का सौदा करने वाले ब्रांड्स पर अब सीधे अदालत की तलवार लटक गई है। विमल इलायची के नाम पर किए जा रहे कथित ‘सरोगेट’ विज्ञापन का मामला दिल्ली हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। अदालत और खाद्य प्रशासन (FDA) के इस कड़े रुख ने उन नामचीन बॉलीवुड सितारों की नींद उड़ा दी है जो चंद रुपयों के लिए इन विज्ञापनों का चेहरा बनते हैं।
विमल ब्रांड की पैरेंट कंपनी पीबी एग्रो ने महाराष्ट्र एफडीए द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह नोटिस किसी और को नहीं बल्कि बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों—शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को भेजा गया था। आरोप साफ और सीधा है: इलायची के नाम पर असल में गुटखा और पान मसाला का अप्रत्यक्ष प्रमोशन किया जा रहा है। आम जनता की आंखों में धूल झोंकने का यह ‘कॉर्पोरेट खेल’ अब एक्सपोज हो चुका है। कंपनियां अदालत में दलीलें दे रही हैं कि वे सिर्फ माउथ फ्रेशनर बेच रही हैं, लेकिन एफडीए का मानना है कि यह सरोगेट एडवरटाइजिंग का खुला उल्लंघन है।
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर अरबों छापने वाली इन कंपनियों और विज्ञापन का चेहरा बने सितारों पर अब कानूनी नकेल कसना तय माना जा रहा है। अगर अदालत ने इस चालाकी पर रोक लगाई, तो सरोगेट विज्ञापनों के साम्राज्य का ढहना निश्चित है।




