गला घोंटती तानाशाही! पीएम मोदी के जन्मदिन पर कॉलेज छात्रों को झुकाने का फरमान, विपक्ष ने कहा- ‘चाटुकारिता की सारी हदें पार’

सत्ता के नशे में चूर व्यवस्था ने अब शिक्षा के मंदिरों को राजनीतिक प्रचार का अखाड़ा बना दिया है। राजस्थान के कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय द्वारा जारी एक फरमान ने राज्य भर के शैक्षणिक गलियारों में आग लगा दी है। पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर महीने भर चलने वाले अभियानों में कॉलेज के छात्रों को अनिवार्य रूप से घसीटने के इस निर्देश के बाद विपक्ष और नागरिक अधिकारों के संगठनों ने सीधे तौर पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब देश के युवाओं से उनकी स्वतंत्र सोच छीनकर उन्हें एक राजनीतिक एजेंडे का मोहरा बनाया जा रहा है?
विपक्ष के नेता टीकाराम जूली और PUCL (पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज) ने इस आदेश को सीधी तानाशाही और “चाटुकारिता की पराकाष्ठा” करार दिया है। PUCL की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने सख्त लहजे में कहा कि जीवित और सक्रिय नेताओं की जय-जयकार करने के लिए छात्रों को मजबूर करना उन्हें मध्ययुगीन सामंती सोच में धकेलने जैसा है। कॉलेजों का काम वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशील नागरिक तैयार करना है, न कि किसी पार्टी की राजनीति का प्रचारक बनाना। वहीं, बीजेपी सरकार इसे ‘सुशासन और जनसेवा’ का नाम देकर ढाल बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन छात्र संगठनों और आम जनता का गुस्सा भड़क चुका है।
इस पूरे प्रकरण ने लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों पर गहरा प्रहार किया है। जब सरकारी पैसों और तंत्र का इस्तेमाल किसी एक व्यक्ति की राजनीतिक ब्रांडिंग के लिए होने लगे, तो उसे सुशासन नहीं, बल्कि लोकतंत्र का पतन कहा जाएगा। अगर शैक्षणिक संस्थानों को राजनीतिक प्रयोगशाला बनाने की यह कोशिश तुरंत बंद नहीं की गई, तो युवाओं का यह आक्रोश सड़कों पर उतरने में देर नहीं लगाएगा।



