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Exclusive – महावीर जयंती पर पूरे देश के बैंक बंद, पर इस बैंक के भीतर क्या चल रहा है ?

रायपुर – महावीर जयंती के मौके पर, पूरे देश में जहां बैंक बंद थे, वहीं दूसरी तरफ रायपुर के कलर्स मॉल में एक बैंक ऐसा भी था, जो बदस्तूर चल रहा था और बैंक के भीतर बैठे कर्मचारी काम पर लगे थे, लेकिन हैरानी वाली बात ये है कि ये बैंक आम लोगों के लिए नहीं खुला था, बल्कि इसकी वजह कुछ और ही थी, पहली नजर में शायद आप भी इसे एक सामान्य सी बात समझेंगे लेकिन, 4RTHEYENEWS ने जब अंदर जाकर कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों से बात की तो हमें ये मामला उतना भी सीधा नहीं लगा, जितना जान पड़ रहा था.

ऑफ रिकॉर्ड काम क्यों कराया जा रहा है ?

दरअसल हमें सूचना मिली थी कि बैंक अधिकारियों ने जबरन यहां अपने कर्मचारियों को काम करने के लिए बुलाया है, वो भी उनकी मर्जी के खिलाफ और उनसे बैंक का आधा शटर गिराकर काम कराया जा रहा है, लेकिन बात इतनी भी होती तो हम भी इसे निजी कंपनियों का मामला समझ कर वापस चल देते, लेकिन हमें जब पता चला कि बैंक में जो कर्मचारी काम कर रहे हैं, अटैंडेंस रजिस्टर में उनकी एंट्री तक नहीं कराई गई, मतलब साफ था, बैंक के अंदर कर्मचारी तो काम कर रहे हैं, लेकिन ऑन रिकॉर्ड नहीं बल्कि ऑफ रिकॉर्ड, यानि कि अगर भविष्य में कुछ भी गड़बड़ी सामने आती है तो, इस दिन का रिकॉर्ड बैंक के पास नहीं होगा, और जब बैंक में किसी कर्मचारी की ऑन रिकॉर्ड एंट्री हुई ही नहीं तो गड़बड़ी का ठीकरा किसके सिर फोड़ा जा सकता है.

कर्मचारी-अधिकारियों ने बताई अलग-अलग बातें

मामला लोगों की गाड़ी कमाई का था, तो हमने सबसे पहले वहां मौजूद कर्मचारियों से बात की. जिनमें से एक कर्मचारी ने हमें बताया कि वो अपनी मर्जी से बैंक आया है, और उसे कुछ अपना पर्सनल काम था, लेकिन जब उससे हमने पूछा कि पर्सनल काम के लिए वो कैसे एक बैंक का इस्तेमाल कर सकता है, तो वो बगलें झांकने लगा, क्योंकि शायद उसके पास जवाब नहीं था, बाद में हमने बैंक प्रबंधक से भी बात की साथ ही बैंक की मुंबई ब्रांच में भी मोबाइल से संपर्क किया गया, लेकिन कहीं से हमें संतोषजनक जवाब नहीं मिला ।

बैंक के एक मुंबई अधिकारी ने भी नाम न छापने की शर्त पर बस इतना बताया कि वे कर्मचारी अपनी मर्जी से छुट्टी वाले दिन ऑफिस आए हैं, जिनके काम पेंडिंग हैं, या फिर जिन्हें आने वाले दिनों में छुट्टी पर जाना है, उसके लिए बैंक प्रबंधन ऐसे कर्मचारियों को मेल पर सहमति देता है, लेकिन उनकी अटेंडेंस नहीं लगाई जाती ।

फिर भी सवाल ये उठता है कि बिना अटेडेंस के कैसे, बैंक जैसी संवेदनशील जगह पर किसी से ऑफ रिकॉर्ड काम कराया जा सकता है, और अगर इस दौरान किसी तरह की कोई गड़बड़ी हो जाती है तो इसका जिम्मेदारी कौन लेगा ?

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