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गिधवा-परसदा पक्षी विहार में प्रवासी मेहमानों का मेला, वेटलैंड विकास और संरक्षण पर बड़ा फोकस

A fair of migratory guests at Gidhva-Parasada Bird Sanctuary, a major focus on wetland development and conservation

रायपुर। प्रसिद्ध गिधवा-परसदा पक्षी विहार अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, शांत वातावरण और हर साल आने वाले प्रवासी पक्षियों की वजह से पर्यावरण प्रेमियों की पहली पसंद बन चुका है। आज वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने बेमेतरा के नवागढ़ ब्लॉक स्थित इस विहार का विस्तृत निरीक्षण किया।

दौरे के दौरान उन्होंने यहां मौजूद विभिन्न तालाबों, प्राकृतिक आर्द्रभूमि, संरक्षण क्षेत्रों और पक्षियों के ठहराव स्थलों का जायजा लिया। निरीक्षण में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वी. श्रीनिवास राव, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरुण पांडे, मुख्य वन संरक्षक दुर्ग एम. मर्सी बेला, कलेक्टर रणवीर शर्मा और वन मंडलाधिकारी दुर्ग दीपेश कपिल भी शामिल रहे।

प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों और प्रवास चक्र पर विस्तृत चर्चा

वन मंत्री कश्यप ने अधिकारियों से इस मौसम में पहुंची प्रवासी प्रजातियों, उनकी अनुमानित संख्या, प्रवास अवधि, आहार और प्रजनन व्यवहार से जुड़ी बारीक जानकारी ली। बारहेड गूज, नॉर्दर्न शवलर, कॉमन टील, पिनटेल डक, पेंटेड स्टॉर्क, ओपनबिल्ड स्टॉर्क, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क और सारस क्रेन जैसी विदेशी प्रजातियों की मौजूदगी पर उन्होंने संतोष जताया।
उनका कहना था कि गिधवा-परसदा वेटलैंड अब प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख बर्ड-वॉचिंग गंतव्यों में अपनी पहचान बना रहा है।

संवर्धन, सुरक्षा और पर्यटन को लेकर सख्त निर्देश

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रवासी पक्षियों के सुरक्षित प्रवास के लिए वेटलैंड क्षेत्र में मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम रखा जाए। अवैध शिकार, शोर-शराबा और अनियंत्रित गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने के भी निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि तालाबों के जल स्तर और प्राकृतिक आहार व्यवस्था के वैज्ञानिक प्रबंधन पर खास ध्यान देना होगा।

नियमित मॉनिटरिंग टीम और इको-पर्यटन विकास की तैयारी

उन्होंने सुझाव दिया कि पक्षियों की सतत निगरानी के लिए नियमित मॉनिटरिंग टीम गठित की जाए। साथ ही गिधवा-परसदा को इको-पर्यटन मॉडल के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि स्थानीय लोगों को ज्यादा रोजगार मिल सके।
कलेक्टर ने मौजूदा संरक्षण कार्यों, सफाई अभियानों, पक्षी मित्र दल और जागरूकता गतिविधियों की जानकारी साझा की।

ग्रामीणों के सुझावों को भी मिली अहमियत

मंत्री ने आसपास के ग्रामीणों से बातचीत कर उनके अनुभव सुने। ग्रामीणों ने बताया कि अक्टूबर से मार्च के बीच पक्षियों के आगमन से पर्यटन और पर्यावरणीय गतिविधियां बढ़ जाती हैं। मंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र का विकास स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।

अंतर्राष्ट्रीय पहचान की दिशा में बड़ा लक्ष्य

मंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य गिधवा-परसदा पक्षी विहार को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग सर्किट में शामिल करना है। इसके लिए साइनबोर्ड, बर्ड वॉचिंग टॉवर, सोलर लाइटिंग और जैवविविधता अध्ययन केंद्र जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विभाग मिलकर इस प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा सुनिश्चित करें और आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करें।