मॉस्को से शांति का न्योता, मैदान में बारूद की गंध: रूस-यूक्रेन जंग में कूटनीति और टकराव साथ-साथ

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक ओर बातचीत की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं, तो दूसरी ओर जमीनी हालात और ज्यादा विस्फोटक होते जा रहे हैं। क्रेमलिन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को एक बार फिर मॉस्को आकर शांति वार्ता करने का न्योता दिया है। रूस के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने साफ किया है कि अगर जेलेंस्की आते हैं तो उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी रूस उठाएगा। हालांकि कीव की ओर से इस प्रस्ताव पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच मारे गए सैनिकों के शवों का आदान-प्रदान हुआ है और वार्ता की संभावनाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। इसी कड़ी में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के बीच अगली बातचीत रविवार को अबू धाबी में प्रस्तावित है, जहां मानवीय मुद्दों, युद्धबंदियों की अदला-बदली और बुनियादी ढांचे पर हमलों जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है।
हालांकि, रूस ने उन रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि दोनों देश ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। क्रेमलिन का कहना है कि ऐसी अटकलों पर फिलहाल कोई टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।
मैदान-ए-जंग की बात करें तो हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी सेना ने यूक्रेन के सूमी क्षेत्र के बिला बेरेजा गांव पर कब्जा कर लिया है। यह इलाका रूस की सीमा से सटा हुआ है और यहां बीते कुछ समय से लगातार झड़पें हो रही हैं। वहीं यूक्रेन ने इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
दूसरी ओर, जापोरिजिया क्षेत्र में रूसी ड्रोन हमलों ने तबाही मचाई है। इन हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए हैं। यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, रूस ने एक ही रात में 105 ड्रोन दागे, जिनमें से 84 को मार गिराया गया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि बीते 24 घंटों में इस इलाके पर 800 से ज्यादा हमले किए गए।
इसी बीच चेचन्या के नेता रमजान कादिरोव ने युद्ध को और तेज करने की वकालत करते हुए कहा है कि रूस को निर्णायक जीत के लिए सैन्य दबाव बढ़ाना चाहिए। उनके इस बयान से साफ है कि रूसी सत्ता के भीतर भी शांति और आक्रामकता को लेकर अलग-अलग सोच मौजूद है।
2022 से जारी इस युद्ध ने अब तक हजारों जानें ली हैं और लाखों लोगों को बेघर कर दिया है। हालांकि बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यही है कि संघर्ष अब भी थमता नजर नहीं आ रहा।
अब सबकी निगाहें अबू धाबी में होने वाली बैठक पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या यह वार्ता किसी ठोस समाधान की ओर बढ़ेगी या फिर यह भी कूटनीतिक औपचारिकता बनकर रह जाएगी। फिलहाल, युद्ध और शांति के बीच झूलती दुनिया सांस रोके अगला कदम देख रही है।



