हार के तुरंत बाद BCCI का ‘टेंडर तमाशा’: जब टीम लॉर्ड्स में पिट रही थी, तब बोर्ड बेच रहा था राइट्स, फैंस का चढ़ा पारा!

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की प्राथमिकताएं क्या हैं? यह सवाल एक बार फिर देश के करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों के जेहन में कौंध रहा है। 20-21 जुलाई के बीच जब भारतीय टीम इंग्लैंड की सरजमीं पर लॉर्ड्स के मैदान में 387 रन पिटवा कर सीरीज गंवा रही थी, ठीक उसी समय बीसीसीआई के हेडक्वार्टर से आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी की जा रही थी—मैच की समीक्षा के लिए नहीं, बल्कि स्पॉन्सरशिप और एसोसिएट पार्टनर राइट्स के अरबों रुपये के टेंडर (Request for Quotation) जारी करने के लिए!
फैंस का गुस्सा इस बात पर फूटा है कि जब देश की राष्ट्रीय टीम मैदान पर दिशाहीन गेंदबाजी और खराब कप्तानी के कारण शर्मसार हो रही थी, तब बोर्ड के अधिकारी सिर्फ इस बात की गणित बिठाने में व्यस्त थे कि नए टेंडर से अपनी तिजोरी में कितने और 100 करोड़ रुपये जोड़े जाएं। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने बीसीसीआइ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बोर्ड का ध्यान केवल पैसे छापने वाली मशीन यानी आईपीएल और स्पॉन्सरशिप राइट्स पर है। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि भारतीय टीम विदेशी दौरों पर टेस्ट और वनडे सीरीज गंवा रही है।
बीसीसीआई की इस बेलगाम और व्यापारिक सोच ने भारतीय क्रिकेट के गिरते स्तर में योगदान दिया है। युवा खिलाड़ियों को बिना घरेलू क्रिकेट में तपाए सीधे बड़े मंचों पर उतारा जा रहा है, चोटिल खिलाड़ियों के बैकअप तैयार नहीं हैं और गेंदबाजी कोच के पास कोई ठोस रणनीति नहीं है। लेकिन बोर्ड को इससे क्या? उनके पास तो टाइटल स्पॉन्सरशिप और वीडियो इक्विपमेंट टेंडर के कागजात तैयार हैं। यदि बीसीसीआइ ने पैसों के मोह से बाहर निकलकर क्रिकेट के बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय टीम के प्रदर्शन पर ध्यान नहीं दिया, तो भारतीय फैंस का यह बढ़ता आक्रोश बहुत जल्द क्रिकेट के इस व्यापारिक साम्राज्य को हिलाकर रख देगा।




