आचार्य सत्येन्द्रनाथ बोस की स्मृति में विज्ञान का उत्सव, क्वांटम भौतिकी पर विशेष व्याख्यान

रायपुर। भारत के विश्वविख्यात वैज्ञानिक आचार्य सत्येन्द्रनाथ बोस की पुण्यतिथि पर छत्तीसगढ़ में विज्ञान और जिज्ञासा का अनूठा संगम देखने को मिला। छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त आयोजन में एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विज्ञान के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के पूर्व कुलपति डॉ. एस.के. पाण्डेय रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में आचार्य बोस के जीवन के विभिन्न पड़ावों—बाल्यकाल, शिक्षा, शैक्षणिक यात्रा और वैज्ञानिक उपलब्धियों—को क्रमबद्ध और प्रेरक रूप में प्रस्तुत किया।
डॉ. पाण्डेय ने क्वांटम भौतिकी में आचार्य बोस के ऐतिहासिक योगदान पर विशेष जोर देते हुए बोस-आइंस्टीन सांख्यिकी को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने बोसॉन की अवधारणा, उनकी विशेषताओं और आधुनिक भौतिकी में उनकी भूमिका को रोचक उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट किया।
उन्होंने बताया कि आचार्य बोस के शोध से प्रेरित होकर अल्बर्ट आइंस्टीन ने उनके सिद्धांतों को आगे बढ़ाया, जिससे बोस-आइंस्टीन संघनन जैसी क्रांतिकारी वैज्ञानिक अवधारणा विकसित हुई। आज इसका उपयोग क्वांटम अनुसंधान, आधुनिक भौतिकी और उन्नत तकनीकों में किया जा रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत साइंस सेंटर के महानिदेशक प्रशांत कविश्वर के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने आचार्य बोस की मौलिक सोच, वैज्ञानिक दृष्टि और युवाओं के लिए उनके प्रेरक जीवन पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर शासकीय विद्यालय दलदल सिवनी और बी.पी. पुजारी स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही। साथ ही बी.एड. और डी.एड. विज्ञान विषय के शिक्षक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, रायपुर के अतिरिक्त संचालक जे.पी. रथ सहित छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक, अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।




