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भारत की इकोनॉमी चमकी या सच छिपाया गया? PMI रिपोर्ट ने खड़े किए बड़े सवाल

भारत की निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में अप्रैल 2026 में तेजी दर्ज की गई है। एचएसबीसी द्वारा जारी फ्लैश इंडिया कंपोजिट PMI के अनुसार यह आंकड़ा मार्च के 57.0 से बढ़कर 58.3 हो गया है, जो लगातार विस्तार का संकेत देता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में खास उछाल देखा गया, जहां PMI 55.9 तक पहुंच गया और उत्पादन 59.1 पर पहुंचा। सर्विस सेक्टर भी बढ़ा, हालांकि अपेक्षाकृत धीमी गति से, जहां इंडेक्स 57.9 रहा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि घरेलू मांग मजबूत हुई है और नए ऑर्डर में तेजी आई है। हालांकि निर्यात के मामले में मिश्रित संकेत मिले हैं। मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट में 9 महीने का उच्च स्तर देखा गया, लेकिन सर्विस एक्सपोर्ट में गिरावट आई, जिसका कारण मध्य पूर्व में जारी युद्ध बताया गया है।

इनपुट लागत में थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन ईंधन और कच्चे माल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। कंपनियों ने कीमतें बढ़ाई हैं, लेकिन यह लागत के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा, बिजनेस कॉन्फिडेंस में गिरावट आई है, जो महंगाई और वैश्विक अनिश्चितता को दर्शाता है।

रिपोर्ट के अनुसार रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई है, जो 10 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। लेकिन LPG सप्लाई को घरेलू उपयोग के लिए प्राथमिकता देने से इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है।

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