आज 18 अक्टूबर की सुबह फ्रांस की सड़कों पर भड़की हिंसा ने पूरे यूरोप को हिलाकर रख दिया है। 5 लाख से अधिक प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर सरकारी नीतियों, बढ़ती महंगाई और पेंशन सुधारों के खिलाफ जो मोर्चा खोला था, वह देखते ही देखते बेकाबू होकर हिंसक दंगों में बदल गया। फ्रांस के लिमोज शहर में स्थिति उस वक्त भयावह हो गई, जब उपद्रवियों की हिंसक भीड़ ने 19वीं सदी की ऐतिहासिक धरोहर यानी लिमोज टाउन हॉल (Hôtel de Ville) पर पेट्रोल बमों से हमला बोल दिया। कुछ ही मिनटों में टाउन हॉल की इमारत आग की लपटों से घिर गई और दो विश्व युद्धों की साक्षी रही यह ऐतिहासिक इमारत पूरी तरह जलकर खाक हो गई। मार्सेली, लील और पेरिस की सड़कों पर भी स्थिति बेकाबू दिखी, जहां प्रदर्शनकारियों ने सिटी हॉल में जबरन घुसकर तोड़फोड़ की, सड़कों पर खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी और लग्जरी शोरूम्स व सुपरमार्केटों को लूट लिया। फ्रांस के आंतरिक मामलों के मंत्रालय के आदेश पर दंगा विरोधी पुलिस ने मोर्चा संभालते हुए पूरे देश में आंसू गैस के गोले छोड़े, वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और 400 से अधिक उग्र उपद्रवियों को गिरफ्तार कर लिया। इस भयानक दंगे और धरोहर के विनाश ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार की नींव हिलाकर रख दी है और पूरे फ्रांस में आपातकाल जैसे हालात बन चुके हैं।
फ्रांस में उग्र विरोध प्रदर्शन: लिमोज का ऐतिहासिक टाउन हॉल जलकर खाक, 400 से अधिक उपद्रवी गिरफ्तार






