‘सफेद हाथी’ बनीं भारतीय ट्रेनें! AC कोच से ‘कंबल-चादर’ उड़ा रहे चोर, जनता के टैक्स के पैसों पर डाका!

भारतीय रेलवे को लेकर एक ऐसी सच्चाई सामने आई है जिसे सुनकर आपका खून खौल जाएगा। हम डिजिटल इंडिया और बुलेट ट्रेन के सपने देख रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश के पढ़े-लिखे और तथाकथित ‘सभ्य’ लोग जो एसी कोच (AC Coaches) में सफर करते हैं, वे रेलवे की चादरें, कंबल और तकिए चुराकर घर ले जा रहे हैं! एक ताजा आरटीआई (RTI) के जवाब ने रेलवे के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। रिपोर्ट बताती है कि एसी डिब्बों से भारी मात्रा में लिनन (linen) गायब हो रहा है, जिससे सरकारी खजाने को हर साल करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है। यह चोरी कोई गरीब नहीं कर रहा, बल्कि जेब में भारी-भरकम टिकट रखने वाले वीआईपी और मिडिल क्लास के लोग कर रहे हैं।
हद तो तब हो जाती है जब लोग रेलवे की इस संपत्ति को अपनी बपौती समझ लेते हैं। क्या हमारा नैतिक स्तर इतना गिर चुका है कि हम चंद रुपयों के कंबल और तौलियों के लिए देश की साख दांव पर लगा रहे हैं? एक तरफ सरकार देश की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन लॉन्च करने का ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम की नाक के नीचे से पूरा का पूरा कंबल-चादर का सिंडिकेट और चोरों की फौज सक्रिय है। रेलवे प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है और सीसीटीवी के दावों के बीच यह चोरी धड़ल्ले से जारी है। जनता के टैक्स का पैसा जो देश के विकास में लगना चाहिए, वह इन ‘चोर सहयात्रियों’ की वजह से लिनन के घाटे को पूरा करने में बह रहा है। यदि इन सफेदपोश चोरों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो रेलवे सिर्फ घाटे का एक ऐसा सरकारी अड्डा बनकर रह जाएगी, जिसे बचाना नामुमकिन होगा। अब समय आ गया है कि इन चोरों के चेहरे रेलवे स्टेशनों पर सार्वजनिक किए जाएं।




