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‘लाल सागर से फारस की खाड़ी तक भारत का अभेद्य चक्रव्यूह!’ हूतियों और ईरान के उपद्रव के बीच भारत ने दिया कड़ा संदेश- ‘हमारे हितों पर हमला यानी सीधा विनाश!’

पश्चिम एशिया की स्थिति और अधिक विस्फोटक हो गई, जब यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद करने का दावा किया और सऊदी अरब के रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच नौसैनिक टकराव के चलते वैश्विक आपूर्ति शृंखला ध्वस्त होने के कगार पर है। लेकिन इस सर्वनाशकारी माहौल के बीच भारत ने अपनी सैन्य तैयारी और बहु-आयामी कूटनीति (Multi-alignment) से एक ऐसा सुरक्षा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसने भारत के राष्ट्रीय हितों को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया है।

बीते 24 घंटों के घटनाक्रम में भारतीय विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय ने संयुक्त समीक्षा बैठक कर पश्चिम एशिया में भारत के वाणिज्यिक रास्तों की सुरक्षा का जायजा लिया। भारत ने अमेरिका, ईरान और इजराइल तीनों पक्षों को बिना किसी लाग-लपेट के सख्त संदेश भेजा है कि भारतीय नौवहन (Indian Shipping) और ऊर्जा जहाजों में किसी भी प्रकार की रुकावट को भारत बर्दाश्त नहीं करेगा।

ईरान द्वारा नियंत्रित रणनीतिक चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) के जरिए भारत ने मध्य एशिया और रूस तक व्यापार का एक वैकल्पिक और सुरक्षित समुद्री गलियारा चालू रखा है। जहां अमेरिकी और यूरोपीय जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, वहीं भारत अपनी कूटनीतिक स्वायत्तता के बल पर चाबहार मार्ग का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहा है। ईरान सरकार ने भी भारत के साथ अपने ऐतिहासिक और व्यापारिक संबंधों का सम्मान करते हुए भारतीय जहाजों को विशेष सुरक्षा मार्ग प्रदान करने का भरोसा दिया है।

दूसरी ओर, लाल सागर में हूती हमलों से भारतीय मालवाहक जहाजों की रक्षा के लिए भारतीय नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स 24×7 गश्त कर रहे हैं। भारतीय नौसेना के मरीन कमांडोज (MARCOS) ने किसी भी समुद्री डकैती या संदिग्ध ड्रोन हमले को पलक झपकते ही बेअसर करने की पूरी तैयारी कर रखी है।

भारत की इस आक्रामक और आत्मनिर्भर विदेश नीति ने यह साबित कर दिया है कि जब दुनिया की बड़ी-बड़ी महाशक्तियां युद्ध के दलदल में फंसकर लाचार हो जाती हैं, तब भारत अपनी शक्ति, संप्रभुता और रणनीतिक सोच के बल पर न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति और शक्ति का प्रतीक बनकर उभरता है।

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