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कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय झटका? सिंधु जल संधि मामले में भारत का बड़ा इनकार

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय द्वारा जम्मू-कश्मीर की जलविद्युत परियोजनाओं पर दिए गए फैसले को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। भारत सरकार ने साफ कहा है कि सिंधु जल संधि को “स्थगित” रखने का उसका फैसला अभी भी प्रभावी है।

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जिस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने यह फैसला दिया है, वह “गैरकानूनी तरीके” से गठित किया गया था। भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने जिन परियोजनाओं पर आपत्ति जताई है, वे संधि के नियमों के दायरे में ही आती हैं।

इस बयान के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में नई तल्खी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल विवाद आने वाले समय में दोनों देशों के बीच और बड़ा राजनीतिक तथा कूटनीतिक मुद्दा बन सकता है। पाकिस्तान पहले भी भारत पर सिंधु जल संधि के उल्लंघन के आरोप लगाता रहा है, जबकि भारत लगातार इन आरोपों को खारिज करता आया है।

यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही सीमा और सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है। अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के इस रुख ने नई बहस छेड़ दी है कि क्या दक्षिण एशिया में जल संसाधन आने वाले समय का सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकते हैं।

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