विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच से पश्चिमी देशों और विरोधी ताकतों को करारा जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया अब पुरानी बहुराष्ट्रीय व्यवस्था के भरोसे नहीं चलने वाली। दुनिया में शक्ति संतुलन (Global Power Rebalancing) का नया दौर शुरू हो चुका है, जहाँ भारत किसी की मर्जी का मोहताज नहीं, बल्कि खुद नियम तय कर रहा है।
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति में जो बड़ा फेरबदल (Enormous Churn) आ रहा है, उसमें भारत अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है। भारत अब किसी महाशक्ति के दबाव में झुकने वाला देश नहीं है, बल्कि अपनी संप्रभुता और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है। दुनिया के स्थापित आर्थिक ढांचे ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं और भारत वैश्विक शक्ति के रूप में केंद्र बिंदु बन चुका है।
भारत का यह आक्रामक रुख उन तमाम पश्चिमी मीडिया घराणों और भारत-विरोधी लॉबी के मुंह पर जोरदार तमाचा है जो भारत को एक उभरती ताकत के बजाय केवल एक बाजार समझते थे। भारत ने साफ कर दिया है कि नई वैश्विक व्यवस्था में भारत का स्थान शीर्ष पर रहेगा और किसी भी वैश्विक फैसले में भारत की सहमति अनिवार्य होगी।
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