राजधानी दिल्ली का प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया कैंपस 18 अक्टूबर की तड़के गोलियों और लाठियों जैसी खौफनाक रात का गवाह बना। छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर पिछले 6 दिनों से ‘गुलिस्तान-ए-गालिब’ के गेट नंबर-7 पर शांतिपूर्ण भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को यूनिवर्सिटी प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों ने तड़के सुबह 5:30 बजे जबरन घसीटकर बाहर कर दिया। आरोप है कि 100 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों ने मस्जिद वाले रास्ते से चुपचाप घुसकर प्रदर्शनकारी छात्रों पर बेरहमी से हमला किया, उनके बाल खींचे और पेट में लातें मारीं।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का यह तानाशाही रवैया यहीं नहीं रुका; पूरे कैंपस की बिजली काटकर अंधेरा फैला दिया गया ताकि इस बर्बरता का कोई सबूत न बन सके। इस घटना के विरोध में दोपहर होते-होते 300 से अधिक उग्र छात्रों ने गेट नंबर-7 तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की और वीसी तथा रजिस्ट्रार के पोस्टरों की धज्जियां उड़ाते हुए मार्च निकाला। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने कैंपस के सभी रास्तों को सील कर छावनी में तब्दील कर दिया है। प्रशासन का दावा है कि छात्रों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल भेजा गया, लेकिन वायरल हो रहे वीडियो यूनिवर्सिटी के झूठे दावों और दमनकारी नीतियों की पूरी पोल खोल रहे हैं।
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