UPI पर बड़ा बदलाव! बड़े कारोबारियों से लिया जा सकता है शुल्क, छोटे डिजिटल भुगतान पर असर नहीं

भारत में UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस को लेकर शुल्क व्यवस्था में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। सरकार UPI के संचालन और डिजिटल भुगतान नेटवर्क के लिए टिकाऊ फंडिंग मॉडल तैयार करने पर विचार कर रही है। इसके तहत बड़े कारोबारियों से UPI भुगतान पर शुल्क लेने की व्यवस्था का रास्ता खुल सकता है। रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था आम यूजर्स के लिए UPI भुगतान को प्रभावित करने के बजाय बड़े कारोबारियों से जुड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर केंद्रित हो सकती है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार कुछ UPI लेनदेन पर दोबारा शुल्क लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया है। प्रस्तावित शुल्क 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू हो सकता है और इसका दायरा अधिक राजस्व वाले कारोबारियों तक सीमित रखने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में 0.3 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत तक शुल्क की जानकारी दी गई है।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य UPI नेटवर्क के संचालन और विस्तार के लिए वित्तीय आधार मजबूत करना बताया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और यह भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे प्रमुख माध्यम बन गया है। रॉयटर्स के अनुसार UPI पर मासिक लेनदेन की संख्या छह साल में करीब 1 अरब से बढ़कर 24 अरब तक पहुंच गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित शुल्क केवल UPI के एक सीमित हिस्से को प्रभावित करेगा। इससे छोटे डिजिटल भुगतान और आम उपभोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले भुगतान पर सीधे शुल्क लगाने की बात नहीं है। यही वजह है कि इस प्रस्ताव को UPI के बड़े कारोबारी इस्तेमाल से जोड़कर देखा जा रहा है।
UPI को लेकर शुल्क का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए UPI पर सामान्य तौर पर ग्राहकों के लिए शुल्क नहीं रखा गया। अब UPI के बढ़ते इस्तेमाल और इसके संचालन की लागत के बीच ऐसी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है, जिससे भुगतान नेटवर्क को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाया जा सके।
इस प्रस्ताव का असर बैंकों, पेमेंट कंपनियों और बड़े मर्चेंट कारोबारियों पर पड़ सकता है। UPI के जरिए बड़ी मात्रा में भुगतान करने वाले कारोबारियों के लिए लेनदेन लागत बढ़ने की संभावना रहेगी। दूसरी ओर भुगतान कंपनियों के लिए यह व्यवस्था डिजिटल भुगतान ढांचे, सुरक्षा और तकनीकी विस्तार में निवेश के लिए अतिरिक्त राजस्व का रास्ता खोल सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक UPI पर प्रस्तावित बदलाव का लक्ष्य आम उपयोगकर्ता से शुल्क लेना नहीं बल्कि बड़े मर्चेंट लेनदेन से जुड़े शुल्क के जरिए भुगतान व्यवस्था के लिए नया आर्थिक मॉडल तैयार करना है। ऐसे में UPI इस्तेमाल करने वाले करोड़ों लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा कि प्रस्तावित शुल्क किस तरह लागू होता है और इसका अंतिम दायरा क्या तय किया जाता है।
फिलहाल UPI शुल्क को लेकर बहस जारी है। सरकार की ओर से तैयार की जा रही व्यवस्था में बड़े कारोबारियों और भुगतान नेटवर्क की वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखा जा रहा है। अंतिम नियम लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन कारोबारियों और किस प्रकार के लेनदेन पर शुल्क लगेगा।



