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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत: अब पसंद की साड़ी खुद चुनेंगी, राशि सीधे खाते में आएगी

Major relief for Anganwadi workers: They will now choose their preferred sarees themselves, and the funds will be credited directly to their accounts.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सुशासन और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण फैसले ले रही है। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के हित में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार लागू किया है। अब उनके लिए साड़ी की केंद्रीकृत खरीद व्यवस्था समाप्त कर दी गई है और निर्धारित राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि साड़ी खरीद प्रक्रिया को लेकर प्राप्त सुझावों और सामने आई विभिन्न समस्याओं के गंभीर परीक्षण के बाद यह निर्णय लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी पसंद, सुविधा और आवश्यकता के अनुसार स्वयं साड़ी का चयन कर सकेंगी। इससे न केवल उनकी स्वतंत्रता बढ़ेगी बल्कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) नीति का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए विभाग ने यह कदम उठाया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंचेगी।

विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि साड़ी का मूल डिजाइन पूर्ववत रखा जाए तथा अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से चर्चा के बाद तय किया जाए। साड़ी का रंग और डिजाइन विभागीय वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे पूरे प्रदेश में एकरूपता बनी रहे। वहीं कपड़े की गुणवत्ता और प्रकार जैसे कॉटन, सिंथेटिक या अन्य विकल्पों का चयन स्थानीय स्तर पर संबंधित कार्यकर्ता और सहायिकाएं स्वयं कर सकेंगी।

लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि विभाग वर्षों पुरानी व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा कर रहा है और जहां भी सुधार की आवश्यकता महसूस होगी, वहां हितग्राहियों के हित में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के सम्मान, सुविधा और अधिकारों की रक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

गौरतलब है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित की गई है। नई व्यवस्था को प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण आधारित प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे लाभार्थियों को अधिक अधिकार और सुविधा प्राप्त होगी।