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बीजापुर में पुनर्वास की नई पहल, 17 लाख के ऋण से आत्मसमर्पित नक्सलियों और ग्रामीणों को मिला स्वरोजगार का सहारा

बीजापुर वनमंडल ने वन प्रबंधन समितियों के खातों में जमा लाभांश और चक्रीय निधि का उपयोग करते हुए आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं वनांचल के ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में अहम पहल की है। विभाग ने कुल 17 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराकर चार हितग्राहियों को स्वरोजगार शुरू करने का अवसर दिया है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।

योजना के तहत पामेड़ और आवापल्ली परिक्षेत्र के चार लाभार्थियों को विभिन्न व्यवसायों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इनमें तीन लोगों को किराना दुकान शुरू करने के लिए क्रमशः 2 लाख, 3 लाख और 2 लाख रुपये का ऋण दिया गया, जबकि एक हितग्राही को ट्रैक्टर, ट्रॉली और डोजर खरीदने के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई।

इस पहल का लाभ दिलीप बीराबोईन (कोतापल्ली समिति), दिनेश कुमार कचलम (मुरदोंडा समिति), जोशिला भगत (कोतापल्ली समिति) और नागुल सत्यनारायण (आवापल्ली समिति) को मिला है। विभाग का मानना है कि यह सहायता उनके लिए स्थायी आजीविका का माध्यम बनेगी और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी।

वन विभाग ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल वन संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि वनांचल के लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति देना है। विशेष रूप से आत्मसमर्पित नक्सलियों को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना, स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना तथा क्षेत्र में शांति, विश्वास और समावेशी विकास को बढ़ावा देना इस पहल का प्रमुख लक्ष्य है।

वनमंडल बीजापुर ने भविष्य में भी पात्र हितग्राहियों को आजीविका आधारित योजनाओं से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसे प्रयास लगातार जारी रखने की बात कही है।

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