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राजिम कुंभ कल्प के सातवें दिन भक्ति और लोकसंस्कृति का महासंगम, देर रात तक गूंजे भजन

रायपुर। राजिम कुंभ कल्प के सातवें दिन मुख्य मंच भक्ति, लोकसंस्कृति और कला के रंगों से सराबोर नजर आया। मनोज राजपूत इंटरटेनमेंट के तत्वावधान में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों की प्रस्तुतियों ने देर रात तक श्रद्धालुओं को बांधे रखा। कार्यक्रम की शुरुआत संतोष थापा की जगराता प्रस्तुति से हुई, जहां “हे गणपति गणराज तेरी जय हो…” जैसे भजनों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। कर्मा माता की महिमा पर आधारित गीतों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

शिव भक्ति और झांकियों ने लूटा मन

संतोष थापा द्वारा प्रस्तुत “हर हर भोला…” और “बम बम भोलेनाथ…” गीतों के साथ मंच शिवमय हो उठा। इसी दौरान मनोज राजपूत की शिवजी वेशभूषा में आकर्षक झांकी ने दर्शकों से खूब तालियां बटोरीं। शीतला माता से जुड़े गीतों पर श्रद्धालु झूमते और साथ गुनगुनाते नजर आए।

राधा-कृष्ण से हनुमान भक्ति तक

जस गीतों की शानदार प्रस्तुति के बाद कार्यक्रम के अंतिम चरण में मनोज राजपूत हनुमान जी की विशाल वेशभूषा में मंच पर पहुंचे। “बजरंग बली, गली-गली में नाम है” पर उनका जोशीला नृत्य देखकर पूरा पंडाल भक्ति में डूब गया।

देवराज मिश्रा की प्रस्तुति ने बांधा समां

बेमेतरा से आए कलाकार देवराज मिश्रा ने शिव भक्ति और छत्तीसगढ़ी लोकगीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। “ओम नमः शिवाय”, “मंगल भवन अमंगल हारी” और प्रेम रस से भरे छत्तीसगढ़ी गीतों पर श्रोता झूमते रहे। “तोर नथली के मोती रे…” गीत की तो दर्शकों ने दोबारा फरमाइश भी की।

लोकसंस्कृति की झलक

मया के सिंगार नवागांव चंपारण की प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति को जीवंत कर दिया। फागुन की मस्ती से जुड़े गीतों ने माहौल को उल्लासपूर्ण बना दिया और दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

कलाकारों का सम्मान

कार्यक्रम के समापन पर सभी कलाकारों का सम्मान राजिम विधायक रोहित साहू, सरपंच संघ अध्यक्ष हरीश साहू एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि नेहरू साहू द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। संचालन निरंजन साहू, मनोज सेन एवं किशोर निर्मलकर ने किया।

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