रायपुर : चुनाव प्रत्याशियों को विज्ञापन प्रकाशन-प्रसारण के लिए अनुमति लेना अनिवार्य

रायपुर : भारत निर्वाचन आयोग के निर्दशानुसार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति से विज्ञापनों की अनुमति लेना अनिवार्य है। ऐसी अनुमति सभी राजनैतिक दलों, राजनैतिक समूहों एवं प्रत्याशियों के लिए बाध्यकारी है। विज्ञापन किसी दल या प्रत्याशी के विरुद्ध नहीं दिया जा सकता है। रायपुर जिले की 7 विधानसभा सीटों के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. बसवराजु एस. के निर्देशन पर जिला पंचायत भवन के भूतल पर मीडिया अनुवीक्षण मीडिया प्रमाणन समिति (एमसीएमसी) का कार्यालय स्थापित किया गया है। जहां से प्रत्याशियों को प्रचार-प्रसार के लिए प्रमाणन कराना होगा।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद हुआ निर्णय

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 13 अप्रैल 2004 के एक निर्णय के अनुसार चुनाव को दौरान किसी भी केबल टेलिविजन या टेलिविजन चैनल पर कोई भी राजनैतिक विज्ञापन भारत निर्वाचन आयोग द्वारा के अधीन बनाए गई मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति द्वारा प्रमाणित किए जाने के बाद ही दिखाए जा सकेंगे। दरअसल विज्ञापनों का प्रमाणन चुनाव के दौरान मूल आधार आदर्श आचार संहिता के पालन से जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि सामाजिक समरसता को बिगाडऩे वाले अथवा तनाव को बढ़ाने वाले, शांति को भंग करने वाले, देश के संविधान और कानून के विपरीत, नैतिकता, सदाचार के विपरीत और किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाले विज्ञापनों के प्रसारण की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रावधान के अनुसार एमसीएमसी के निर्णय के विरुद्ध मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की समिति में अपील की जा सकती है।

प्रमाणन के लिए बनी मीडिया अनुवीक्षण मीडिया प्रमाणन समिति (एमसीएमसी)

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आधार पर भारत निर्वाचन आयोग ने मीडिया प्रमाणन के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। जिसके अनुसार मीडिया प्रमाणन एवं निगरानी समिति का गठन किया गया है। इस समिति को सामान्यत: एमसीएमसी के नाम से जाना जाता है। मीडिया प्रमाणन के संबंध में राज्य में दो स्तरीय मीडिया प्रमाणन समिति होती है। पहली समिति मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) द्वारा नामांकित राज्य स्तर पर तथा दूसरी समिति जिला स्तर पर गठित की गई है। इसमें कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी बसवराजु एस. की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति मीडिया अनुवीक्षण और प्रमाणन का कार्य कर रही है।

किन विज्ञापनों के लिए जरूरी है मीडिया प्रमाणन

प्रत्याशियों और राजनैतिक दलों को मीडिया प्रमाणन के अंतर्गत टीवी चौनल, केबल नेटवर्क टेलिविजन चौनल, रेडियो जिसमें निजी एफ चौनल रेडियो भी शामिल हैं। सिनेमा घर मल्टीप्लेक्स, वेबसाईटों में ई-समाचार पत्र, बल्क एसएमएस, व्हाईस मैसेज तथा सार्वजनिक स्थलों पर दृश्य श्रव्य माध्यम के उपयोग के लिए अनुमति लेनी होगी। वहीं किसी दल, प्रत्याशी अथवा व्यक्ति के लिए निजी सोशल मीडिया एकाऊंट पर फोटो, वीडियो, ब्लॉग तथा प्रिन्ट मीडिया में विज्ञापन के लिए अनुमति की जरुरत नहीं होगी परंतु पोस्ट की जाने वाली सामग्री आदर्श आचरण संहिता के दायरे में होगी।

मीडिया प्रमाणन किसके लिए जरूरी

सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल, अन्य राजनैतिक दल जिन्हें मान्यता नहीं है, राजनैतिक सगंठन, व्यक्तियों का समूह, ट्रस्ट, एकल प्रत्याशी या कोई अन्य व्यक्ति को अनिवार्य रुप से मीडिया प्रमाणन कराना होगा। राजनैतिक दलों, संगठनों एवं समूह को विज्ञापन के प्रमाणन के लिए राज्य स्तरीय समिति से तथा प्रत्याशी को विज्ञापन के लिए जिला स्तरीय एमसीएमसी समिति के प्रमाणन कराना जरूरी होगा।

आवेदन की प्रक्रिया

आवेदकों को एमसीएमसी निर्धारित प्रपत्र में आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इस हेतु मान्यता प्राप्त राजनैतिक दल अथवा प्रत्याशी को प्रस्तावित विज्ञापन की डिजीटल प्रति दो प्रतियों में प्रसारण प्रारंभ होने से कम से कम तीन दिन पूर्व एमसीएमसी समिति को प्रस्तुत करना होगा, जबकि अन्य को सात दिन पूर्व आवेदन प्रस्तुत करना होगा। एमसीएमसी विज्ञापन में संशोधन अथवा विलोपन का निर्देश दे सकती है जिसे 24 घंटे के भीतर दिए गए सुझाव के अनुसार संशोधन कर एमसीएमसी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।

संतोषजनक जवाब नहीं पाए जाने पर आवेदन निरस्त भी किया जा सकता है। भारत निर्वाचन आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि अनुमति का अर्थ विज्ञापन में कही गई बातों, आंकडों और तथ्यों की पुष्टि करना नहीं है। साथ ही समिति किसी विज्ञापन के कारण होने वाले किसी नुकसान, हानि अथवा चोट के लिए जिम्मेदार नहीं होगी। आवेदकों को विज्ञापन की कुल लागत, प्रसारण व्यय व अवधि, किस प्रत्याशी का विज्ञापन है आवेदन पत्र में बताना होगा, साथ ही उसे यह भी घोषणा करनी होगी कि सारा भुगतान चेक या ड्रॉफ्ट के माध्यम से किया जाएगा।

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