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खेत बचाओ अभियान: बगौद में जुटे कृषि वैज्ञानिक, किसानों को दिए फसल सुरक्षा और बेहतर आमदनी के गुरुमंत्र

'Save the Farms' Campaign: Agricultural scientists gather in Bagaud, offer farmers expert advice on crop protection and better income.

रायपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर एवं कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बेमेतरा के संयुक्त तत्त्वावधान में आज बेमेतरा जिले के ग्राम बगौद में ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत हुई। इस अभियान की मुख्य सोच किसानों को कीट-रोगों और जैविक तनाव से होने वाली हानि के प्रति सचेत करना, फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक खेती को सीधे खेतों तक पहुँचाना है।

अभियान के नोडल अधिकारी व संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. एस. के. जैन, डॉ. के. सी. शर्मा, डॉ. अजय वर्मा और KVK बेमेतरा से डॉ. लव कुमार की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने सीधे किसानों के बीच पहुँचकर उनकी जमीनी समस्याओं को सुना और व्यावहारिक समाधान बताए।

वैज्ञानिकों का संदेश: जागरूक बनें, विविधीकरण अपनाएँ

जोखिम कम करेगी विविधीकृत खेती (डॉ. पंकज शर्मा): फसलों को जैविक तनावों से बचाने के साथ-साथ खेती को टिकाऊ, लाभदायक और जलवायु-अनुकूल बनाना अभियान का मूल लक्ष्य है। किसानों को पारंपरिक ढर्रे से हटकर फसल चक्र, वैकल्पिक फसलें और समन्वित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाने की सलाह दी गई, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग हो और आमदनी बढ़े।

संतुलित पोषण और सही कीटनाशक उपयोग (डॉ. के. सी. शर्मा): समय रहते कीट-रोगों की पहचान, संतुलित खाद का प्रयोग और रासायनिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से बचने की हिदायत दी गई। पर्यावरण-अनुकूल और वैज्ञानिक सुरक्षा उपायों पर जोर दिया गया।

स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल खेती (डॉ. लव कुमार): मिट्टी की सेहत बचाने, स्थानीय परिवेश के हिसाब से फसल चुनने और उपलब्ध कृषि तकनीकों का सही लाभ उठाकर पैदावार तथा मुनाफा दोनों बढ़ाने का आह्वान किया गया।

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