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बस्तर दशहरा की रथ परिक्रमा में दो बड़े हादसे, बिजली का पोल गिरा, स्कूटी सवार रथ के नीचे घिसटा!

Two major accidents during the Bastar Dussehra chariot procession: an electricity pole fell, and a person on a scooter was dragged underneath the chariot!

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की फूल रथ परिक्रमा के दौरान दो अलग-अलग हादसों ने उत्सव के माहौल में अफरा-तफरी मचा दी। विशाल रथ खींचने के दौरान एक ओर बिजली का पोल टूटकर लोगों पर जा गिरा, तो दूसरी ओर एक स्कूटी सवार रथ की चपेट में आ गया। दोनों घटनाओं के वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा हुआ है।

पहली घटना में रथ खींचते समय विशाल रथ सड़क किनारे लगे बिजली के पोल से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बिजली का पोल टूटकर पास में खड़े लोगों के ऊपर जा गिरा। अचानक हुए इस हादसे से मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हादसे में कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। पूरी घटना पास में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई।

वहीं, दूसरी घटना में रथ परिक्रमा के दौरान एक स्कूटी सवार रथ की चपेट में आ गया। सामने आए वीडियो में स्कूटी सवार रथ के साथ काफी दूर तक घिसटता दिखाई दे रहा है। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे बचाने का प्रयास किया।

हजारों की भीड़ के बीच निकाली जाती है रथ परिक्रमा

दरअसल, बस्तर दशहरा की रथ परिक्रमा में हर साल हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। सैकड़ों लोग एक साथ रस्सियों के सहारे विशाल लकड़ी के रथ को खींचते हैं। रथ के आसपास श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में जरा सी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

फिलहाल दोनों घटनाओं में घायलों की कुल संख्या और स्कूटी सवार की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

618 साल पुरानी है बस्तर दशहरा की परंपरा

बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की सबसे अनूठी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पर्व भगवान राम के रावण वध से जुड़ी दशहरे की परंपरा से अलग है। यहां आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की आराधना और आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ दशहरा मनाया जाता है।

करीब 618 साल पुरानी इस परंपरा का आयोजन लगभग 75 दिनों तक चलता है। इस दौरान फूल रथ परिक्रमा प्रमुख आकर्षण होती है। इसमें बस्तर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग और श्रद्धालु शामिल होते हैं।

बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय संस्कृति, सामूहिक आस्था और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है। हालांकि, इस बार रथ परिक्रमा के दौरान सामने आए दो हादसों ने आयोजन में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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