सरगुजा में ‘छेरी बैंक’ मॉडल का कमाल: बिना नकद कर्ज, बकरियों से आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अनोखा और नवाचारी मॉडल सामने आया है। ‘सरगुजा छेरी बैंक’ के नाम से शुरू की गई इस पहल के तहत महिलाओं को नकद ऋण देने के बजाय बकरी पालन के लिए बकरियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। खास बात यह है कि लाभार्थियों को पैसे की किस्त नहीं चुकानी होती, बल्कि वे बकरियों के बच्चों (मेमनों) के रूप में भुगतान करती हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत जिला पंचायत द्वारा संचालित इस योजना की शुरुआत लखनपुर विकासखंड से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की गई है। ग्राम पंचायत अमगसी की सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य सोहर मणी जैसी महिलाएं अब इस योजना से जुड़कर अपनी आय का स्थायी साधन बना रही हैं। उन्होंने 3,000 रुपये की प्रारंभिक राशि देकर चार बकरियां प्राप्त कीं और बकरी पालन का काम शुरू किया।
इस योजना की खासियत सिर्फ बकरियां देना नहीं, बल्कि उनका संपूर्ण देखभाल पैकेज भी है। लाभार्थियों को 40 महीनों तक टीकाकरण, डिवार्मिंग और प्रजनन जैसी सुविधाएं दी जाती हैं, जिससे पशुओं की उत्पादकता बनी रहती है। तय नियमों के अनुसार महिलाओं को चार वर्षों में 16 मेमने वापस ‘छेरी बैंक’ को देने होते हैं।
शुरुआती चरण में 50 महिलाओं को इस योजना से जोड़ा गया है और 76 बकरियों के साथ इसकी शुरुआत हुई है। अनुमान के मुताबिक, चार बकरियों से 8 वर्षों में 60-65 मेमनों का उत्पादन संभव है। ऐसे में निर्धारित मेमने लौटाने के बाद भी महिलाओं के पास पर्याप्त पशुधन बचता है, जिससे उनकी आमदनी लगातार बनी रहती है।
‘छेरी बैंक’ मॉडल महिलाओं के लिए बिना जोखिम वाला और भरोसेमंद निवेश विकल्प बनकर उभर रहा है। इसमें न तो ब्याज का बोझ है और न ही नकद किस्तों का दबाव। यही वजह है कि महिलाएं पूरे समर्पण के साथ पशुपालन कर रही हैं। यह पहल न सिर्फ महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है।




