बस्तर के किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए अब खेती के साथ पशुपालन, मत्स्यपालन, कुक्कुटपालन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके जरिए किसानों को आय के कई विकल्प उपलब्ध कराने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने जगदलपुर में आयोजित संभाग स्तरीय खरीफ समीक्षा एवं रबी 2026 की तैयारी बैठक में अधिकारियों को इस दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
बैठक में उन्होंने कहा कि बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियां और प्राकृतिक संसाधन एकीकृत कृषि प्रणाली के विकास के लिए अनुकूल हैं। यहां खेती के साथ पशुपालन, मछलीपालन, सब्जी उत्पादन, फल उत्पादन और कुक्कुटपालन को जोड़कर किसानों के लिए आमदनी के नए रास्ते खोले जा सकते हैं। इससे ग्रामीण परिवारों को सालभर रोजगार और आय के अवसर मिलेंगे। साथ ही मौसम और बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी कम होगा।
खेती के साथ पशुपालन और मछलीपालन पर जोर
कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि किसानों को केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय खेती के साथ अन्य गतिविधियां भी अपनानी चाहिए। खेतों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर कम लागत में अधिक लाभ हासिल किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि पशुपालन को खेती से जोड़ने पर जैविक खाद की उपलब्धता बढ़ेगी और फसल अवशेषों का इस्तेमाल पशुओं के चारे के रूप में किया जा सकेगा। वहीं खेतों में डबरी निर्माण कर मत्स्यपालन और आसपास सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इस तरह किसान एक ही कृषि इकाई से अलग-अलग माध्यमों से कमाई कर सकेंगे।
मांस और अंडों की मांग को देखते हुए पशुपालन पर फोकस
बस्तर की प्राकृतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए परदेशी ने कहा कि यहां पर्याप्त हरियाली, चारागाह और बेहतर भूजल स्तर उपलब्ध है। ऐसे में पशुपालन और मत्स्यपालन के क्षेत्र में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं।
स्थानीय बाजार में मांस और अंडों की बढ़ती मांग को देखते हुए इन गतिविधियों को प्राथमिकता देने की जरूरत है। उन्होंने झींगापालन जैसी योजनाओं में एरिएटर सहित जरूरी तकनीकी सुविधाओं को परियोजना में पहले से शामिल करने के निर्देश भी दिए।
छोटे किसानों के लिए भी तैयार होंगे आय बढ़ाने के मॉडल
बैठक में छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। कृषि उत्पादन आयुक्त ने कहा कि स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ऐसे मॉडल विकसित किए जाएं, जिन्हें कम जमीन वाले किसान भी आसानी से अपना सकें।
इसके लिए किसानों को उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक, संतुलित उर्वरक उपयोग, कृषि यंत्रों, जल संरक्षण और फसल विविधीकरण के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए। साथ ही बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने और किसानों को उनके उत्पादों के बेहतर विपणन की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
नकली खाद-बीज बेचने वालों पर होगी सख्ती
आगामी रबी सीजन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए परदेशी ने ऑनलाइन उर्वरक प्रबंधन प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बाजार में अमानक और नकली खाद, बीज एवं कीटनाशकों की बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने को कहा।
उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों के साथ समन्वय बनाकर काम करने और खेत बचाओ अभियान को पूरी तत्परता से संचालित करने के निर्देश भी दिए।
धान के बदले दलहन-तिलहन और मिलेट्स को प्रोत्साहन
बैठक में संचालक कृषि राहुल देव ने फसल विविधीकरण पर प्रस्तुति दी। उन्होंने धान के स्थान पर दलहन, तिलहन और मिलेट्स की खेती को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। इसके अलावा ऑयल पाम की खेती और इंटरक्रॉपिंग को बढ़ावा देने तथा किसानों को कृषि आदान सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
रबी 2026 की कार्ययोजना के तहत बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण आसानी से उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह ने सभी विभागों को स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए समन्वित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। वहीं संभाग के जिला कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा की।
इस दौरान कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, सहकारिता और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।











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