‘सुशासन तिहार’ का असर: गांव-गांव पहुंचा प्रशासन, पहले ही दिन 47% मामलों का मौके पर समाधान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कोशिश अब तेज रफ्तार पकड़ चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच के अनुरूप बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में ‘सुशासन तिहार’ के जरिए प्रशासन सीधे ग्रामीणों तक पहुंच रहा है। इस अभियान की शुरुआत शुक्रवार को ग्राम रिसदा से हुई, जहां पहले ही दिन सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।
रिसदा में आयोजित शिविर में प्रशासनिक सक्रियता साफ नजर आई। कुल 573 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से करीब 47 प्रतिशत मामलों का तत्काल निराकरण कर दिया गया। मौके पर मौजूद राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता अंतिम व्यक्ति तक राहत पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि शिविर के बाद आवेदकों से फीडबैक लेकर संतुष्टि का आकलन किया जाए।
जिन मामलों में तकनीकी अड़चनें सामने आईं, उनके लिए कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने तय समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासन अब लंबित फाइलों के बजाय त्वरित समाधान पर फोकस कर रहा है।
यह शिविर सिर्फ शिकायत निवारण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे योजनाओं के ‘वन-स्टॉप डिलीवरी सेंटर’ के रूप में भी विकसित किया गया। पुलिस विभाग ने सड़क सुरक्षा के तहत हेलमेट वितरित किए, वहीं भारत माता वाहिनी को संसाधन सौंपे गए। युवाओं को कौशल विकास प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और टीबी मुक्त गांवों के सरपंचों को महात्मा गांधी की प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी राहत देखने को मिली। शिविर में डिजिटल एक्स-रे और तत्काल आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे खासकर बुजुर्गों और मरीजों को काफी फायदा हुआ।
प्रशासन ने साफ किया है कि यह पहल केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि 10 जून तक चलने वाला व्यापक अभियान है। जिले के 30 ग्रामीण केंद्रों और 19 नगरीय निकायों में इसके माध्यम से हर नागरिक तक प्रशासन की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।
रिसदा से शुरू हुआ यह ‘सुशासन अभियान’ अब जिले के अन्य क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। पहले दिन की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासन गांव की चौपाल तक पहुंचे, तो समस्याओं का समाधान तेजी से संभव है।




