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भारतीय कूटनीति का चक्रव्यूह: पश्चिम एशिया की जंग के बीच पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर दुनिया को सिखाया शांति का पाठ!

जब दुनिया की दो बड़ी सैन्य ताकतें (अमेरिका और ईरान) आपस में भिड़ रही हैं, तब भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक धक जमाई है। पिछले 24 घंटों के भीतर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष एंथनी अल्बनीज ने एक उच्चस्तरीय बैठक और बातचीत के बाद साझा बयान जारी किया है। भारत ने पश्चिम एशिया में भड़की इस हिंसा पर गहरी चिंता जताते हुए दोनों पक्षों से तुरंत युद्ध रोकने और तनाव कम करने (De-escalation) की पुरजोर अपील की है। भारत ने दोटूक शब्दों में कहा है कि हिंसा और युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकते।

यह पूरी तरह से भारत के फेवर में जाने वाली खबर है क्योंकि जब दुनिया दो धड़ों में बंट रही है, तब भारत एक जिम्मेदार वैश्विक महाशक्ति (Global Power) के रूप में उभर रहा है। पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि भारत किसी भी युद्ध गुट का हिस्सा बनने के बजाय वैश्विक शांति और स्थिरता का पक्षधर है। भारत की इस संतुलित लेकिन आक्रामक कूटनीति ने वैश्विक मंच पर वाशिंगटन और तेहरान दोनों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि नई दिल्ली की सहमति के बिना इस क्षेत्र में कोई भी स्थायी हल नहीं निकल सकता। वैश्विक स्तर पर भारत के इस रुख की सराहना हो रही है।

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