जातिगत जनगणना पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, देश में नया राजनीतिक भूचाल

भारत में जातिगत जनगणना को लेकर चल रहा विवाद अब और तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि जाति आधारित जनगणना सरकार का नीतिगत फैसला है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। कोर्ट का कहना था कि पिछड़े वर्गों की सही संख्या जानना सरकार के लिए जरूरी है ताकि कल्याणकारी योजनाएं बेहतर तरीके से बनाई जा सकें। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में जातिगत आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस चरम पर है। विपक्षी दल इसे सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि कई संगठन इसे समाज को बांटने वाली राजनीति करार दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या जातिगत जनगणना से आरक्षण की राजनीति और बढ़ेगी? वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सरकारी योजनाओं का सही लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच सकेगा। 2027 की जनगणना को देश की पहली पूरी तरह डिजिटल और व्यापक जातिगत गणना बताया जा रहा है। इस फैसले ने आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।



