‘ट्रंप का युद्धविराम का नाटक बेनकाब!’ होर्मुज में बारूद की गंध के बीच अमेरिका की लाचारी, ईरान ने ललकारा- ‘एक भी दाना उठाना भारी पड़ेगा’

पश्चिम एशिया के रणक्षेत्र में अमेरिकी आक्रामकता को ईरान के कठोर इरादों ने करारा झटका दिया है। पिछले 24 घंटों के घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि अमेरिका का दो सप्ताह से जारी बमबारी अभियान अब थमने को मजबूर हुआ है। वाशिंगटन भले ही इसे ‘कूटनीति के लिए दिया गया समय’ बता रहा हो, लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों और सटीक हथियारों के घटते स्टॉक ने पेंटागन को अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर किया है।
26-27 जुलाई के बीच अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच मिसाइल हमलों का सिलसिला थमने के बाद भी होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ऐलान किया है कि ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। इसके जवाब में, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और ईरानी सैन्य कमान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ईरानी जलक्षेत्र में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण अमरीकी जहाजों के लिए श्मशान घाट बन जाएगा।
बीते 24 घंटों के दौरान संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने स्वीकार किया कि अमेरिकी बल ‘लॉक एंड लोडेड’ हैं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप शांति वार्ताओं को एक मौका देना चाहते हैं। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी नौसेना पर एक व्यापारी जहाज को निशाना बनाने का आरोप लगाया है जो उसकी नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था।
होर्मुज की नाकेबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति लाइनें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। ओमान की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के मंडराते खतरे के कारण प्रमुख ग्लोबल शिपिंग लाइन्स अब अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ का लंबा और खर्चीला रास्ता अपनाने पर मजबूर हैं। इस बीच, ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों ने भी लाल सागर में बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद करने का दावा करते हुए सऊदी अरब और अमेरिकी ठिकानों पर नए मिसाइल हमले करने की धमकी दी है।
अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी इस युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन घिरता नजर आ रहा है। नए सर्वेक्षणों के मुताबिक, 70% से अधिक अमेरिकी नागरिक इस युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। इसके बावजूद, वाशिंगटन और तेहरान के बीच ओमान और पाकिस्तान के जरिए हो रही गुप्त बातचीत में ईरान ने यह शर्त रख दी है कि जब तक अमेरिका खाड़ी से अपनी सैन्य मौजूदगी खत्म नहीं करता, तब तक कोई स्थायी संघर्षविराम नहीं होगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका की एकतरफा सैन्य धौंस का दौर अब समाप्त हो चुका है। ईरान की भूमिगत मिसाइल साइटें और उसका क्षेत्रीय नेटवर्क अमेरिकी आक्रामकता का डटकर मुकाबला कर रहे हैं, जिससे पश्चिम एशिया इतिहास के सबसे बड़े सैन्य गतिरोध के मुहाने पर खड़ा हो गया है।


