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भारत में महिलाओं की खेती पर ‘वैश्विक सम्मेलन’ — सशक्तिकरण या महज भाषणबाजी?

भारत 12 से 14 मार्च 2026 तक महिलाओं की कृषि-खाद्य प्रणाली में भूमिका पर वैश्विक सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। नई दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उद्देश्य कृषि और खाद्य सुरक्षा में महिलाओं के योगदान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना बताया गया है।

आयोजकों के अनुसार, दुनिया भर में खेती और खाद्य उत्पादन में महिलाओं की बड़ी भूमिका है, लेकिन निर्णय-निर्माण और संसाधनों तक पहुंच में वे पीछे हैं। सम्मेलन में तकनीक, वित्तीय सहायता, बाजार पहुंच और नेतृत्व क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

हालांकि कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन अक्सर जमीनी बदलाव से ज्यादा औपचारिक घोषणाओं तक सीमित रह जाते हैं। उनका तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को भूमि अधिकार, ऋण और प्रशिक्षण जैसी बुनियादी सुविधाएँ अभी भी पर्याप्त रूप से नहीं मिल पातीं।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अधिकारियों ने कहा कि यह मंच देशों के बीच अनुभव साझा करने और नीतिगत सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। सम्मेलन से महिलाओं की आय बढ़ाने और खाद्य प्रणालियों को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने की उम्मीद जताई गई है।

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