भोरमदेव जंगल सफारी की शुरुआत: छत्तीसगढ़ को मिला नया इको-टूरिज्म हॉटस्पॉट

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में प्रकृति और रोमांच का अनोखा संगम अब “भोरमदेव जंगल सफारी” के रूप में साकार हो गया है। बहुप्रतीक्षित इस परियोजना का भव्य शुभारंभ उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और सांसद संतोष पाण्डेय ने फीता काटकर किया।
करीब 36 किलोमीटर लंबे सफारी रूट और 352 वर्ग किलोमीटर में फैले अभयारण्य के बीच यह पहल पर्यटकों को घने जंगलों, ऊँची पहाड़ियों और समृद्ध जैव विविधता के बीच करीब से प्रकृति का अनुभव कराएगी। सफारी का प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के पास करियाआमा क्षेत्र में बनाया गया है, जो इस पूरे अनुभव को धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी देता है।
शुभारंभ के मौके पर नेचर गाइड्स को जिप्सी की चाबी और कैंपिंग सामग्री दी गई, वहीं महिला स्व-सहायता समूहों को बर्तन किट वितरित कर स्थानीय सहभागिता को भी बढ़ावा दिया गया। इसके बाद अतिथियों ने दूरदूरी जलप्रपात तक सफारी का आनंद लिया।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह सफारी न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी। वहीं वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा को वैश्विक पहचान दिलाने वाला कदम बताया।
सांसद संतोष पाण्डेय ने इसे कबीरधाम के विकास की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि अब प्रदेश के साथ-साथ देशभर से पर्यटक यहां आकर वन्यजीवों और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कर सकेंगे।
डीएफओ निखिल अग्रवाल के अनुसार, यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित की गई है।
सफारी के दौरान पर्यटकों को कई आकर्षक स्थलों का अनुभव मिलेगा, जिनमें टेडगा सालेह ग्रासलैंड, जैतपुरी घासभूमि, बर खोल्हा व्यू प्वाइंट, बकोदा ग्रासलैंड, दूरदूरी झरना, भाई-बहन कोरा, बाज़ार डोंगरी और करियाआमा जैसे प्राकृतिक व सांस्कृतिक स्थल शामिल हैं।
भोरमदेव जंगल सफारी अब सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है।




