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ईद की तारीख पर फिर टकराव के आसार? सऊदी अदालत की अपील ने दुनिया भर में बढ़ाई बेचैनी

रमज़ान 2026 के अंतिम दिनों में ईद-उल-फितर की तारीख को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और बहस का माहौल बनता दिख रहा है। सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के मुसलमानों से 18 मार्च की शाम शव्वाल का चाँद देखने की अपील की है, जिससे यह तय होगा कि ईद कब मनाई जाएगी। चाँद दिखने पर अगले दिन ईद मनाई जाएगी, जबकि न दिखने पर रोज़ा एक दिन और बढ़ जाएगा।

यह परंपरा इस्लामी कैलेंडर की चांद पर आधारित प्रणाली के कारण हर साल अनिश्चितता पैदा करती है। कई देशों में वैज्ञानिक गणनाओं के आधार पर तारीख घोषित की जाती है, जबकि अन्य देशों में प्रत्यक्ष चाँद देखने की परंपरा का पालन होता है। यही कारण है कि अक्सर अलग-अलग देशों में ईद अलग-अलग दिनों में मनाई जाती है, जिससे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ जाती है।

धार्मिक दृष्टि से यह चाँद का दिखना रमज़ान के रोज़ों के समापन और ईद की खुशियों की शुरुआत का संकेत होता है। इसलिए मुस्लिम समुदाय के लिए यह क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सऊदी अरब के निर्णय का असर कई अन्य देशों पर भी पड़ता है, क्योंकि बहुत से देश वहाँ की घोषणा के आधार पर अपनी तारीख तय करते हैं।

हर साल की तरह इस बार भी दुनिया भर में लोग आसमान पर नज़रें टिकाए हुए हैं। अगर चाँद दिखता है तो बड़े पैमाने पर जश्न की तैयारियाँ शुरू हो जाएँगी, अन्यथा रोज़े जारी रहेंगे।

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