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तेल युद्ध ने तोड़ी कमर, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा तो बाजार में मचा हड़कंप

20 मार्च 2026 को रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.92 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया। इससे पहले रुपया 92.63 के स्तर तक पहुंचा था, लेकिन शुक्रवार को यह उससे भी नीचे चला गया। रिपोर्ट के अनुसार इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ता दबाव है। खास तौर पर खाड़ी क्षेत्र के अहम ऊर्जा ढांचे पर हमलों के बाद तेल की कीमतें गुरुवार को लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जिसने भारत जैसे बड़े आयातक देश पर सीधा दबाव बनाया।

रॉयटर्स ने बताया कि शुक्रवार को तेल कीमतों में कुछ नरमी जरूर आई, लेकिन रुपया पर बना दबाव कम नहीं हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप के प्रमुख देशों और जापान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयासों में शामिल होने की पेशकश की है। वहीं अमेरिका ने तेल आपूर्ति बढ़ाने के कदम भी बताए हैं। इसके बावजूद निवेशकों की चिंता बनी हुई है, क्योंकि ऊर्जा झटका भारत की वृद्धि और महंगाई के संतुलन को बिगाड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 8 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी की है। यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ा मासिक बहिर्वाह बताया गया है। यही पूंजी निकासी रुपये पर और दबाव बढ़ा रही है। अर्थशास्त्रियों ने भी चेताया है कि अगर ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी बनी रहती है, तो भारत की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है और महंगाई तेज हो सकती है।

यह खबर केवल मुद्रा बाजार की तकनीकी हलचल नहीं, बल्कि उस बड़े जोखिम की ओर इशारा करती है जिसमें एक दूर के भू-राजनीतिक संघर्ष का असर सीधे भारतीय जेब, आयात बिल, महंगाई और निवेश माहौल पर दिख सकता है। 20 मार्च 2026 की यह स्थिति बताती है कि तेल संकट अब केवल अंतरराष्ट्रीय खबर नहीं रहा, बल्कि भारत की आर्थिक स्थिरता का तात्कालिक सवाल बन गया है।

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