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92 हजार मामलों का दबाव या न्यायपालिका की ‘इमरजेंसी’? सुप्रीम कोर्ट में अचानक बढ़ाए गए 4 जजों ने छेड़ी नई बहस

17 मई 2026 को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को देखते हुए जजों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने का फैसला लागू कर दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद सुप्रीम Court (Number of Judges) Amendment Ordinance, 2026 लागू हुआ। इसके तहत मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। यानी अब भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कुल 38 न्यायाधीश हो सकेंगे।

सरकार का कहना है कि यह कदम न्यायिक लंबित मामलों को कम करने और तेजी से फैसले देने के लिए उठाया गया है। हाल के आंकड़ों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में 92,000 से अधिक मामले लंबित हैं। लंबे समय से अधिक जजों की नियुक्ति की मांग उठ रही थी।

इस फैसले के बाद कानूनी हलकों में बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे न्यायिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सवाल उठा रहा है कि क्या केवल जजों की संख्या बढ़ाने से न्याय में देरी की समस्या दूर हो जाएगी।

कानून मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया कि संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अब नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

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