डिजिटल एडिक्शन से बाहर निकलने की जरूरत, नई पीढ़ी की सोच पर पड़ रहा असर: राज्यपाल रमेन डेका

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन वर्तमान समय की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है, जिसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि परिवार और समाज पर भी पड़ रहा है। उन्होंने युवाओं को डिजिटल लत और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की सलाह देते हुए कहा कि इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और व्यक्ति केवल कृत्रिम संतुष्टि तक सीमित रह जाता है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास करने पर 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेलकूद और बाहरी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उनके अनुसार सीमित दायरे में रह रहे बच्चों की शारीरिक क्षमता और प्रतिरोधक शक्ति पर भी इसका असर पड़ रहा है।
दीक्षांत समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी, नर्सिंग और अन्य संकायों के कुल 7,545 स्नातक, 1,645 स्नातकोत्तर तथा 5 सुपर स्पेशियलिटी विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया।
राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के सफेद कोट की गरिमा हमेशा बनी रहनी चाहिए और मरीजों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना उनका सबसे बड़ा दायित्व है। उन्होंने चिकित्सकों से ऐसा कार्य करने का आग्रह किया जो समाज और देश के लिए प्रेरणा बने।
रमेन डेका ने कहा कि वर्तमान समय में ‘नेबरहुड डॉक्टर’ या पारिवारिक चिकित्सकों की भूमिका फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है। पहले फैमिली फिजिशियन मरीज और उसके परिवार की परिस्थितियों को समझते थे, जिससे बेहतर उपचार संभव हो पाता था। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ बेहद महत्वपूर्ण होता है और ऐसे समय में डॉक्टरों की त्वरित निर्णय क्षमता जीवन बचा सकती है।
उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और टेलीमेडिसिन जैसी आधुनिक तकनीकों की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नवाचारों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों को स्वीकार करने का भी क्षण है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता छत्तीसगढ़ की प्रगति, शिक्षा व्यवस्था और विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार और बस्तर क्षेत्र में नक्सल उन्मूलन के बाद हो रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करना सेवा और जिम्मेदारी दोनों का अवसर है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।




