इजराइल-अमेरिका की महाबैठक में गूंजेगा ‘भारत का नाम’, पश्चिम एशिया में दिल्ली की दादागिरी; मोदी की कूटनीति के आगे झुके ट्रंप-नेतन्याहू!

वॉशिंगटन में आज होने जा रही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ऐतिहासिक मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। लेकिन इस बैठक का जो सबसे बड़ा और कड़ा संदेश निकलकर आ रहा है, वह पूरी तरह भारत के पक्ष में जाता दिख रहा है। राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में पश्चिम एशिया के नए सुरक्षा ढांचे और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा होगी, जिसमें भारत को ‘केंद्रीय धुरी’ (Central Pivot) के रूप में स्थापित किया जा रहा है। ईरान द्वारा लाल सागर और होर्मुज में पैदा किए गए व्यवधान के बाद, अमेरिका और इजराइल दोनों इस बात को मान चुके हैं कि हिंद महासागर से लेकर अरब सागर तक सुरक्षा की कमान सिर्फ और सिर्फ भारत के मजबूत हाथों में ही सुरक्षित रह सकती है।
भारत की इस कूटनीतिक विजय का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि युद्ध के इस दौर में भी इजराइल ने भारत के साथ अपने रणनीतिक और रक्षा सहयोग को रत्ती भर भी कम नहीं होने दिया है। इस महाबैठक में आई2यू2 (I2U2) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) को नए सिरे से और अधिक आक्रामक तरीके से पुनर्जीवित करने पर मुहर लगने की पूरी संभावना है, जो सीधे तौर पर चीन और ईरान के गठजोड़ को मटियामेट कर देगा। संभावना यह भी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भारत को इस पूरे क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा के लिए ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ की औपचारिक भूमिका सौंप सकते हैं। यह कदम भारत की वैश्विक महाशक्ति बनने की राह को बेहद आसान कर देगा और पाकिस्तान-चीन जैसे दुश्मनों के कलेजे पर सांप लोटना तय है।


