मिडिल ईस्ट में शांति समझौते की उम्मीद से वैश्विक बाजार में राहत, भारत को भी फायदा

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम तथा तनाव कम करने की दिशा में हुई बड़ी कूटनीतिक पहल का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था, जिससे भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों की चिंता बढ़ गई थी।
हालिया शांति समझौते के संकेतों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इसका सीधा फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलने की संभावना है। रुपये में मजबूती और सरकारी बॉन्ड बाजार में तेजी देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो भारत में महंगाई पर दबाव कम हो सकता है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ऊर्जा कीमतों में कमी से परिवहन लागत घटेगी और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। वहीं विदेशी निवेशकों का भरोसा भी भारतीय बाजारों की तरफ बढ़ सकता है।
अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका के फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों पर टिकी हुई है। ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले फैसले वैश्विक निवेश और व्यापार को प्रभावित करेंगे।




