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योग बना विश्व एकता का प्रतीक, 190 से ज्यादा देशों में दिखा भारतीय संस्कृति का प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी योग परंपरा आज पूरी दुनिया को जोड़ने वाली एक वैश्विक शक्ति बन चुकी है। 21 जून को दुनिया के अनेक देशों में लोगों ने सामूहिक योग कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर स्वास्थ्य और शांति का संदेश दिया।

भारत की पहल पर शुरू हुआ योग दिवस अब केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन का रूप ले चुका है। अमेरिका, यूरोप, एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में भारतीय दूतावासों के सहयोग से हजारों कार्यक्रम आयोजित किए गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली में तनाव, अनियमित खान-पान और बढ़ती बीमारियों के बीच योग एक प्राकृतिक समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों की स्वास्थ्य नीतियों और वेलनेस कार्यक्रमों में भी योग को शामिल किया जा रहा है।

वर्ष 2026 की थीम “Yoga for Healthy Ageing” विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और बढ़ती उम्र की स्वास्थ्य चुनौतियों को ध्यान में रखकर तय की गई। वैज्ञानिक शोधों में भी यह सामने आया है कि नियमित योग करने से शरीर की लचीलापन, संतुलन, मानसिक शांति और जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए देशभर में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी योग दिवस से जुड़े संदेश और तस्वीरें व्यापक रूप से साझा की गईं।

योग दिवस का यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत और सॉफ्ट पावर की एक बड़ी पहचान बन चुका है।

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