“नक्शे से मिट जाएगा ईरान…” – हॉर्मुज की नाकेबंदी पर बौखलाए डोनाल्ड ट्रंप की महाविनाशकारी धमकी, स्विट्जरलैंड शांति वार्ता में भारी बवाल!

मध्य पूर्व की जंग में बुरी तरह फंसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बौखलाहट अब सारी कूटनीतिक मर्यादाएं लांघ चुकी है। स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक (ल्यूसर्न) में 21 जून 2026 (रविवार) से शुरू हुई बेहद संवेदनशील शांति वार्ता पहले ही दिन बारूद के ढेर में तब्दील हो गई। ईरान द्वारा लेबनान में जारी हिंसा के विरोध में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा बंद करने की घोषणा के बाद, ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू और सोशल मीडिया पर बेहद हिंसक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “यदि तुमने हॉर्मुज को बंद किया, तो तुम्हारे पास कोई देश नहीं बचेगा। तुम अपने देश वापस भी नहीं लौट पाओगे, हम पूरे ईरान पर कब्जा कर लेंगे।” ट्रंप की इस अपमानजनक धमकी के बाद 21 जून को ईरानी वार्ताकारों ने विरोध स्वरूप तुरंत कूटनीतिक मंच से वॉकआउट कर दिया।
हालांकि, कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के भारी दबाव के बाद देर रात तकनीकी स्तर की वार्ता किसी तरह फिर शुरू हो सकी, जिसमें 60 दिनों के भीतर फाइनल डील का रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी है। ट्रंप ने यह तक धमकी दी है कि अगर ईरान शर्तों को नहीं मानता, तो अमेरिका हॉर्मुज के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग पर अपना ‘टोल टैक्स’ लगा देगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड में बैठकर ‘शांति समझौते’ का नाटक कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने साफ़ कर दिया है कि उनके लड़ाकू विमान और युद्धपोत मध्य पूर्व से टस से मस नहीं होंगे। अमेरिका की यह नई दादागीरी खाड़ी देश को एक और भीषण महायुद्ध के मुहाने पर धकेल रही है।




