अमेरिकी धमकियों को ठेंगा! भारत के चक्रव्यूह में फंसा वाशिंगटन, 500 अरब डॉलर की महाडील के लिए झुका अमेरिका, टैरिफ का खेल खत्म

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आर्थिक महाशक्ति के सामने आखिरकार अमेरिका को अपनी अकड़ ढीली करनी पड़ी है। अमेरिकी सीनेटरों द्वारा रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर 100% टैरिफ लगाने की गीदड़भभकी वाले एक बिल के पेश होने के ठीक बाद भारत ने अपनी रणनीतिक चाल चल दी है। भारत के कड़े रुख के आगे बेबस होकर 15-16 जुलाई को ‘यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल’ (USIBC) के अध्यक्ष अतुल कश्यप का बड़ा बयान आया है कि भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) बेहद करीब है और यह 75 वर्षों से लंबित पड़ा हुआ था। अमेरिका ने जो भारत पर जबरन श्रम के नाम पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का दबाव बनाया था, भारत ने उसे मुख्य वार्ता की मेज पर लाकर वाशिंगटन को पछाड़ दिया है।
भारतीय बाजार की ताकत ऐसी है कि अमेरिका इसके बिना दुनिया की आर्थिक कप्तानी का सपना भी नहीं देख सकता। भारत ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका को डेटा सेंटर्स, क्रिटिकल मिनरल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में दुनिया पर राज करना है, तो उसे भारत की शर्तों को मानना ही होगा। वाशिंगटन की मजबूरी बन चुकी है कि वह दोनों देशों के बीच व्यापार को 500 अरब डॉलर के पार ले जाए।
अमेरिकी सांसदों का एक धड़ा भले ही प्रतिबंधों की राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि ट्रम्प प्रशासन भी जानता है कि नई दिल्ली को नाराज करने का मतलब एशिया में अमेरिकी प्रभाव की मौत है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता से एक इंच भी पीछे नहीं हटा है। रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी सीनेट की धमकियों को दरकिनार करते हुए भारत ने अमेरिका को अपनी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर कर दिया है और यह प्रस्तावित महाडील इसका सबसे बड़ा सबूत है।



