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अमेरिकी सीनेट की गीदड़भभकी को भारत की दो टूक: रूसी तेल पर 100% टैरिफ लगाने के बिल को भारत ने कूड़ेदान में फेंका, कहा- ‘हमारी मर्जी के मालिक हम खुद’

वाशिंगटन के कैपिटल हिल में 15 जुलाई को अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने भारत, चीन समेत पांच देशों पर रूसी तेल खरीदने के कारण 100% का दंडात्मक टैरिफ लगाने का एक आक्रामक बिल पेश किया। अमेरिकी सांसदों ने दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि देने के बहाने इस प्रतिबंधात्मक बिल के जरिए भारत को डराने की कोशिश की। लेकिन भारत सरकार ने 24 घंटे के भीतर वाशिंगटन को अपनी कूटनीतिक औकात याद दिला दी है। नई दिल्ली की तरफ से साफ कर दिया गया है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और उसके राष्ट्रीय हित किसी भी विदेशी संसद के बिल के मोहताज नहीं हैं।

भारत के वाणिज्य और विदेश मंत्रालय ने इस बिल को पूरी तरह से गैर-जरूरी और एकतरफा बताते हुए खारिज कर दिया है। भारतीय कूटनीति की यह बहुत बड़ी जीत है कि अमेरिकी सीनेट के इस ड्रामे के बावजूद, खुद अमेरिकी प्रशासन और व्यापारिक संगठन भारत के साथ 500 अरब डॉलर के समझौते को पूरा करने के लिए छटपटा रहे हैं। भारत ने अमेरिका को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यदि वाशिंगटन ने इस प्रकार की आर्थिक ब्लैकमेलिंग बंद नहीं की, तो भारत अमेरिकी कंपनियों को अपने विशाल बाजार से बाहर का रास्ता दिखाने में संकोच नहीं करेगा।

यह भारत का नया रूप है, जो न तो किसी प्रतिबंध से डरता है और न ही किसी वैश्विक महाशक्ति के दबाव में अपनी विदेश नीति बदलता है। भारत लगातार रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपने नागरिकों को महंगाई से बचा रहा है और इस तेल को रिफाइन करके पश्चिमी देशों को ही बेच रहा है। अमेरिका का यह बिल सिर्फ उसकी हताशा को दर्शाता है, क्योंकि वह भारत की बढ़ती आर्थिक और कूटनीतिक संप्रभुता को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहा है।

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