देश की ताज़ा खबरें | Fourth Eye News

ईरान पर अमेरिका का महाविनाशकारी प्रहार: हॉरमुज ब्लॉक करने की हिमाकत पर ट्रम्प ने बरसाईं हेलफायर मिसाइलें, तेहरान बोला- ‘यह अस्तित्व की लड़ाई है

पश्चिम एशिया की धरती 15 और 16 जुलाई 2026 को बारूद के ढेर पर बैठ गई है。 स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज (Strait of Hormuz) को बंद करने और वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने की ईरान की हिमाकत पर अमेरिकी सेना ने ऐसा भयंकर पलटवार किया है जिसने तेहरान के होश उड़ा दिए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के सीधे आदेश पर अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने ईरान के तटीय रक्षा प्रणालियों और क्रूज मिसाइल ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी की है। बुधवार की सुबह शुरू हुआ यह हमला सिर्फ 90 मिनट के भीतर ईरान के तटीय सैन्य तंत्र को तहस-नहस कर गया और इसके तुरंत बाद दूसरी लहर में भी हमले जारी रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि या तो ईरान सरेंडर करे या फिर उसका अस्तित्व मिटा दिया जाएगा।

अमेरिकी सेना ने ईरान की मुख्य भूमि के साथ-साथ ग्रेटर तुनब द्वीप (Greater Tunb Island) और चाबहार के पास स्थित सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। जवाब में बौखलाए ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन दागने का दावा किया है और इसे अमेरिका के खिलाफ अपनी “अस्तित्व की जंग” घोषित कर दिया है। हॉरमुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है, वहां अमेरिका ने दोबारा पूर्ण नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) लागू कर दी है। ईरान के एक तेल टैंकर को भागने की कोशिश करते समय अमेरिकी हेलफायर मिसाइलों ने बीच समंदर में ही अपंग बना दिया।

इस भीषण टकराव ने कच्चे तेल के बाजारों में आग लगा दी है और ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। ईरान की इस उकसावे वाली कार्रवाई ने पूरे वैश्विक व्यापार को खतरे में डाल दिया था, लेकिन अमेरिका की इस भीषण सैन्य कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि दादागीरी का अंत केवल विनाश से होता है। तेहरान के सैन्य ठिकाने धुएं में तब्दील हो चुके हैं और अब ईरान के पास घुटने टेकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button