बाइडेन और ट्रम्प से ऊब चुके इजराइल ने भारत को बनाया अपना परम मित्र, नेतन्याहू बोले- ‘140 करोड़ भारतीयों का साथ हमारी सबसे बड़ी ढाल’

अमेरिका की ढुलमुल नीतियों और आंतरिक राजनीति से तंग आकर इजराइल ने अब अपना रुख पूरी तरह से भारत की ओर मोड़ लिया है। 15-16 जुलाई 2026 को तेल अवीव से आई एक बेहद आक्रामक और रणनीतिक रिपोर्ट ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वाशिंगटन को कड़ा संदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि वे अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता को कम कर रहे हैं और भारत के साथ एक नया, अटूट रक्षा और रणनीतिक मोर्चा खड़ा कर रहे हैं। नेतन्याहू ने एक हालिया पॉडकास्ट में खुलेआम दहाड़ते हुए कहा, “हमें नए गठबंधन बनाने होंगे और यही काम मैं इस समय भारत के साथ कर रहा हूं।” उन्होंने गर्व से दोहराया कि 140 करोड़ भारतीयों का समर्थन इजराइल के लिए दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है।
यह घटनाक्रम पूरी तरह से भारत के पक्ष में जाता है, क्योंकि दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फॉर पीस, इनोवेशन एंड प्रॉस्पेरिटी’ के तहत रक्षा और तकनीक का एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। अमेरिका जहां इजराइल को हथियार देने में अपनी घरेलू राजनीति के चलते आनाकानी करता रहता है, वहीं भारत ने एक सच्चे दोस्त की तरह वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ इजराइल का खुलकर साथ दिया है।
भारत और इजराइल अब न केवल क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (जैसे क्वांटम, एआई और साइबर सुरक्षा) में साथ मिलकर काम कर रहे हैं, बल्कि भारतीय यूपीआई (UPI) को भी इजराइल में लागू करने की हरी झंडी मिल चुकी है। यह नया समीकरण यह दिखाता है कि भारत अब किसी महाशक्ति के पीछे चलने वाला देश नहीं, बल्कि खुद एक ऐसा ध्रुव बन चुका है जिसके साथ आने के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश लालायित हैं। अमेरिका का एकाधिकार खत्म हो चुका है और भारत-इजराइल की यह नई जुगलबंदी वैश्विक व्यवस्था को नया आकार दे रही है।



