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इजराइल की हुंकार को भारत का मूक समर्थन: आतंक के आकाओं को नेस्तनाबूद करने की रणनीति में भारत के हित सुरक्षित!

ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस जंग में इजराइल ने भी अपनी सेना को हाइएस्ट अलर्ट पर डाल दिया है, क्योंकि ईरान की मिसाइलें अब इजराइली सीमा के बेहद करीब गिरने लगी हैं. इस नाजुक मोड़ पर भारत ने बेहद चालाकी और मजबूती से अपनी रणनीतिक चाल चली है. भारत और इजराइल के बीच के मजबूत रक्षा संबंध इस बात का प्रमाण हैं कि भारत आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ इजराइल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है. पिछले 24 घंटों में भारतीय सुरक्षा रणनीतिकारों ने स्पष्ट किया है कि भारत इस क्षेत्र में शांति का पक्षधर है, लेकिन वह किसी भी ऐसे देश के साथ खड़ा नहीं हो सकता जो समुद्री व्यापार और निर्दोषों की जान को खतरे में डालता है.

व्यापारिक दृष्टिकोण से देखें तो इस युद्ध के कारण खाड़ी देशों में भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें नाकाम हो रही हैं. भारत ने अपनी समुद्री सीमाओं पर नौसेना की गश्त बढ़ाकर यह जता दिया है कि वह अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा खुद करने में सक्षम है. इजराइल द्वारा ईरान समर्थित गुटों पर किए जा रहे हमलों से अप्रत्यक्ष रूप से भारत के उन दुश्मनों को भी कड़ा संदेश जा रहा है जो पश्चिम एशिया के रास्ते भारत को घेरने का सपना देखते हैं. भारत का इजराइल के साथ मजबूत खड़ा होना यह साबित करता है कि न्यू इंडिया अब दुनिया के फैसलों पर सिर्फ मूकदर्शक बनकर नहीं बैठता, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सही वक्त पर सही पासा फेंकता है.

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