अमेरिका का ईरान पर महा-हमला: 10वीं रात भी बरसे घातक बम, खुर्रमआबाद के पहाड़ थर्राए!

अमेरिकी सेना ने फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना एकछत्र वर्चस्व कायम करने के लिए ईरान पर लगातार 10वीं रात अब तक का सबसे भयंकर हवाई हमला बोला है। 21 और 22 जुलाई की दरम्यानी रात अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के पश्चिमी प्रांत लोरेस्तान स्थित खुर्रमआबाद (Khorramabad) के पहाड़ी इलाकों में बने रणनीतिक सैन्य ठिकानों को मलबे में तब्दील कर दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर शुरू हुए इस ताज़ा हमले का मकसद ईरान के तटीय निगरानी केंद्रों, मिसाइल लॉन्च पैड्स, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य कमान मुख्यालयों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करना है।
वाशिंगटन ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान होर्मुज की रणनीतिक समुद्री लेन से अपना सैन्य कब्जा नहीं हटाता और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बहाल नहीं होने देता, तब तक यह बमबारी नहीं थमेगी। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने अमेरिकी सीनेट में दहाड़ते हुए कहा कि अमेरिका इस जंग में कोई नरमी नहीं बरतने वाला है। हालांकि इस महा-युद्ध की कीमत अमेरिका को भी चुकानी पड़ रही है— युद्ध का खर्च 37.5 अरब डॉलर को पार कर चुका है और अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद पेंटागन ने आक्रामक तेवर और तीखे कर दिए हैं।
ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने अपने तटवर्ती इलाकों से मिसाइल दागे तो अमेरिका ईरान के पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) और परमाणु बुनियादी ढांचों को राख में मिलाने से भी पीछे नहीं हटेगा। अमेरिकी नौसेना ने खाड़ी में ईरान की पूर्ण नाकेबंदी (Naval Blockade) कर रखी है और वाणिज्यिक जहाजों को जबरन रोककर जांच की जा रही है। पेंटागन का संदेश साफ है: यदि तेहरान ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बंधक बनाने की जुर्रत की, तो अमेरिकी बारूद ईरान के पूरे सैन्य ढांचे को खाक में मिला देगा।
फारस की खाड़ी में बारूद की गंध फैल चुकी है और वैश्विक तेल बाजार में $92 प्रति बैरल की दर से उछाल देखा जा रहा है। अमेरिकी बंबर लगातार ईरानी आसमान में आग उगल रहे हैं और दुनिया स्तब्ध होकर इस भीषण सैन्य टकराव को देख रही है।




