चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंधों की धमकी को भारत ने लात मारी! ईरान के साथ रणनीतिक कॉरिडोर की राह पर नई दिल्ली का आक्रामक रुख!

अमेरिका द्वारा ईरान पर बढ़ाए गए अत्यधिक प्रतिबंधों और अप्रत्यक्ष धमकियों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसकी विदेश नीति की कमान वाशिंगटन के हाथ में नहीं, बल्कि नई दिल्ली के संप्रभु नियंत्रण में है। बीते 24 घंटों में भारतीय जहाजरानी मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने ईरान के रणनीतिक चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) के विस्तार और परिचालन को और अधिक गति देने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। अमेरिका की किसी भी संभावित दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी को खारिज करते हुए भारत ने चाबहार में नए हैवी-ड्यूटी क्रेन और बंदरगाह अवसंरचना की नई खेप तुरंत प्रभाव से तैनात करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने भारत सहित कई देशों पर ईरान के साथ आर्थिक और अवसंरचनात्मक संबंध खत्म करने का परोक्ष दबाव बनाया था। हालांकि, नई दिल्ली ने वाशिंगटन के इस रुख पर अत्यंत आक्रामक और कड़ा जवाब दिया। भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी विदेश विभाग को दोटूक शब्दों में बता दिया कि चाबहार बंदरगाह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, मध्य एशिया तक उसकी पहुंच और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) की आधारशिला है। इस परियोजना पर किसी भी प्रकार का अमेरिकी हस्तक्षेप भारत की संप्रभुता पर हमला माना जाएगा, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भारत के इस साहसिक और दृढ़ संकल्प का परिणाम यह हुआ है कि ईरानी सरकार ने चाबहार के शाहिद बेheshti टर्मिनल पर भारत को पूर्ण परिचालन अधिकार और विशेष सुरक्षा गारंटी प्रदान कर दी है। पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध के बावजूद, चाबहार के रास्ते भारत से मध्य एशिया और रूस जाने वाले भारतीय मालवाहक जहाजों की आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी है। भारत ने चाबहार पोर्ट को सुरक्षित रखने के लिए अपनी नौसैनिक गश्ती नौकाओं को भी तैनात करने का रणनीतिक विकल्प खुला रखा है, जिससे अमेरिकी और पश्चिमी रणनीतिकारों के होश उड़ गए हैं।
चाबहार पर भारत का यह निडर रुख पाकिस्तान और चीन के लिए भी एक बहुत बड़ा रणनीतिक झटका है। चीन जहां ग्वादर बंदरगाह के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता था, वहीं भारत ने चाबहार के माध्यम से पूरे यूरेशियाई व्यापारिक मार्ग पर अपना दबदबा कायम कर लिया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के हौवे को हवा में उड़ाते हुए भारत ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जब बात भारत के भू-राजनीतिक हितों की होगी, तो कोई भी वैश्विक महाशक्ति भारत का रास्ता नहीं रोक सकती।
ईरान के साथ भारत के व्यापारिक और रणनीतिक समीकरणों की यह मजबूती यह दर्शाती है कि भारत ने अपनी वैश्विक स्थिति को इतना मजबूत कर लिया है कि वाशिंगटन भी भारत के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम उठाने की हिम्मत नहीं जुटा सकता। चाबहार पोर्ट पर भारत का यह आक्रामक और रणनीतिक दांव भारतीय कूटनीति के इतिहास में एक सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है, जिसने भारत को यूरेशिया का निर्विवाद रणनीतिक लीडर बना दिया है।


