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सीरिया ने पुतिन को दिया बड़ा झटका! रूस के सैन्य ठिकानों पर बदला पूरा खेल

बशर अल-असद के दौर में सीरिया रूस का रणनीतिक किला था। अब असद सत्ता में नहीं हैं और दमिश्क ने मॉस्को के साथ संबंधों की नई शर्तें तय कर दी हैं। 9 अगस्त को सीरिया और रूस ने Hmeimim और Tartus स्थित रूसी सैन्य सुविधाओं के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण समझौता किया।

Reuters के मुताबिक 18 महीने की बातचीत के बाद दोनों देशों ने एक समझौते पर सहमति बनाई है। इसके तहत Hmeimim एयरपोर्ट और Tartus बंदरगाह की नागरिक सुविधाओं पर सीरियाई नियंत्रण मजबूत होगा, जबकि सैन्य सुविधाओं को संयुक्त प्रशिक्षण और योग्यता केंद्रों के रूप में बदला जाएगा। संक्रमण लगभग तीन महीने में पूरा होने की उम्मीद है।

यह रूस के लिए इतना बड़ा मुद्दा क्यों है?

सीरिया में रूस की सैन्य मौजूदगी की शुरुआत 2015 में हुई थी, जब मॉस्को ने असद सरकार के समर्थन में सीधे सैन्य हस्तक्षेप किया।

Tartus रूस के लिए भूमध्यसागर में महत्वपूर्ण नौसैनिक सपोर्ट पॉइंट रहा है, जबकि Hmeimim एयरबेस रूसी हवाई अभियानों के लिए प्रमुख केंद्र था। AP के अनुसार ये ठिकाने सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान रूस की सैन्य शक्ति के महत्वपूर्ण हिस्से बने।

लेकिन दिसंबर 2024 में असद सरकार के पतन के बाद पूरा समीकरण बदल गया।

नया सीरिया, नई रणनीति

राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की सरकार रूस से संबंध पूरी तरह खत्म करने के बजाय उन्हें नए ढांचे में ढाल रही है।

यानी यह पूरी तरह रूसी निष्कासन नहीं है।

इसके बजाय:

  • नागरिक सुविधाओं पर सीरियाई नियंत्रण बढ़ेगा
  • सैन्य ढांचे का स्वरूप बदलेगा
  • संयुक्त प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी
  • रूस की सैन्य भूमिका पहले जैसी नहीं रहेगी
  • सीरिया दूसरे वैश्विक साझेदारों के साथ संबंध बढ़ा रहा है

Financial Times ने भी इसे रूस की पुरानी सैन्य मौजूदगी में महत्वपूर्ण कमी के रूप में देखा है।

अमेरिका और पश्चिम के लिए इसका मतलब

सीरिया का पश्चिम के साथ संबंध भी बदल रहा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ दमिश्क की बातचीत बढ़ी है। ऐसे में रूस की सैन्य मौजूदगी का पुनर्गठन सिर्फ सीरिया-रूस समझौता नहीं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में प्रभाव की लड़ाई का हिस्सा है।

रूस यूक्रेन युद्ध के बीच पहले ही अपने संसाधनों पर दबाव झेल रहा है। ऐसे में भूमध्यसागर और अफ्रीका तक पहुंच बनाए रखने के लिए सीरिया का महत्व और बढ़ जाता है।

भारत पर असर

भारत के लिए सीरिया में स्थिरता पश्चिम एशिया की व्यापक सुरक्षा से जुड़ी है। भारत के ऊर्जा हित, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय शक्ति संतुलन महत्वपूर्ण है।

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