होर्मुज पर ईरान की पकड़ से दुनिया सहमी, अमेरिका के सामने खुली सबसे बड़ी चुनौती

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले 24 घंटे में सामने आए आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री कारोबार को झटका देना शुरू कर दिया है। टैंकरों की आवाजाही में तेज गिरावट ने अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को होर्मुज से सिर्फ पांच कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि रविवार को कोई जहाज नहीं गुजरा। इसके मुकाबले पिछले सप्ताहांत 31 जहाज इस रास्ते से गुजरे थे। फरवरी में अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से पहले यहां प्रतिदिन 130 से ज्यादा जहाजों की आवाजाही होती थी।
यानी कुछ ही समय में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक की गतिविधि में जबरदस्त गिरावट आई है। यही वजह है कि सोमवार को तेल की कीमतों में तेजी दिखाई दी। ब्रेंट क्रूड 89.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई 82.83 डॉलर तक चढ़ गया।
ईरान की तरफ से साफ संकेत है कि वह अमेरिकी दबाव में आसानी से पीछे हटने के मूड में नहीं है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ वार्ता फिर से शुरू करने को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी जनता से महंगे ईंधन के बीच धैर्य रखने को कह रहे हैं।
संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी से जुड़े एक और टैंकर पर हमले का आरोप लगाया है। अगर इस तरह के हमले बढ़ते हैं तो होर्मुज संकट और गंभीर हो सकता है।
अमेरिका के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ ईरान पर दबाव बनाए रखना और दूसरी तरफ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य रखना। ईरान के लिए भी यह टकराव आसान नहीं है, क्योंकि समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ने से उसकी अपनी आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने के बजाय दबाव की रणनीति पर टिके नजर आ रहे हैं।




