नक्सलियों के गढ़ पर सुरक्षा बलों की बड़ी चोट! कर्रेगुट्टा खाली, लेकिन बारूद का खतरा अभी बाकी

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के बीच पुलिस महानिदेशक अरुणदेव गौतम ने कहा है कि कर्रेगुट्टा पहाड़ी अब नक्सलियों से मुक्त है। हालांकि सुरक्षा बलों के लिए खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इलाके में बारूद और विस्फोटक सामग्री बिछी होने की आशंका के कारण जवानों को लगातार सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
डीजीपी के अनुसार राज्य में नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। कई पारंपरिक नक्सली गढ़ों में अब शांति स्थापित हुई है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सतर्कता के कारण आम जनता में भी सुरक्षा का विश्वास बढ़ा है।
करे्रेगुट्टा पहाड़ी लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से जुड़ा क्षेत्र रहा है। सुरक्षा बलों के अभियान के बाद अब वहां नक्सली मौजूदगी नहीं होने की बात सामने आई है। लेकिन इलाके में पहले से बिछाए गए बारूदी सुरंगों और विस्फोटकों का खतरा बना हुआ है। इसलिए जवानों की गश्त और तलाशी अभियान जारी है।
डीजीपी ने यह भी बताया कि राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों के कारण सुरक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है। जिन इलाकों में पहले नक्सलियों का प्रभाव था, वहां अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ी है।
हालांकि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को पूरी तरह खत्म मानना अभी जल्दबाजी होगी। विशेष रूप से उन इलाकों में जहां पहले नक्सली सक्रिय रहे हैं, वहां सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं।
करे्रेगुट्टा में नक्सली मौजूदगी खत्म होने के बावजूद विस्फोटक खतरा सुरक्षा बलों के सामने बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी वजह से जवान इलाके में तलाशी और निगरानी जारी रखे हुए हैं।




