अमेरिका की टैरिफ चाल पर भारत का पलटवार, 50% शुल्क के खिलाफ WTO में खोला मोर्चा

अमेरिका की ओर से भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को लेकर भारत ने अब कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने अमेरिकी कदम के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन यानी WTO में औपचारिक रूप से परामर्श की मांग की है। मामला अमेरिका की ओर से क्वार्ट्ज सरफेस उत्पादों के आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ-रेट कोटा से जुड़ा है। यह व्यवस्था 15 अगस्त 2026 से लागू हुई है और चार साल तक प्रभावी रहने वाली है।
भारत का कहना है कि इस तरह का शुल्क व्यापार पर प्रतिबंधात्मक असर डाल सकता है। इसी वजह से नई दिल्ली ने WTO के विवाद निपटारा तंत्र के तहत अमेरिका के साथ औपचारिक बातचीत की प्रक्रिया शुरू की है। भारत की आपत्ति सिर्फ शुल्क की दर को लेकर नहीं है, बल्कि व्यापार में निष्पक्षता और नियमों के पालन को लेकर भी है।
अमेरिका और भारत के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिशों के बीच यह विवाद सामने आया है। इसी समय अमेरिका की ओर से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को और गहरा करने तथा 2030 तक 500 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य रखने की बात भी कही जा रही है।
भारत के लिए चुनौती यह है कि एक तरफ अमेरिका के साथ रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाना है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू उद्योग और निर्यातकों के हितों की रक्षा करनी है। भारतीय संसदीय समिति भी सरकार से अमेरिकी व्यापार समझौते को तेजी से आगे बढ़ाने, लेकिन घरेलू हितों और प्रमुख निर्यातों के लिए स्थिर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने की मांग कर चुकी है।
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