रूस-यूक्रेन की जंग अब रोटी पर वार! काला सागर बंद हुआ तो भारत समेत दुनिया पर मंडराया अनाज संकट

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब सिर्फ मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है। काला सागर में कृषि और निर्यात ढांचे पर हमलों ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। रूस और यूक्रेन दोनों ही वैश्विक गेहूं आपूर्ति में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके निर्यात मार्ग बाधित होने से दुनिया के खाद्य बाजार पर सीधा दबाव पड़ सकता है।
यूक्रेन के ब्लैक सी निर्यात में अगस्त के शुरुआती दो सप्ताह में भारी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के मुताबिक रूस के हमलों से ब्लैक सी बंदरगाहों से निर्यात प्रभावित हुआ है और यूक्रेन का अनाज निर्यात शुरुआती दो सप्ताह में 75 प्रतिशत तक गिर गया।
स्थिति इसलिए गंभीर है क्योंकि रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के गेहूं की करीब 27 प्रतिशत आपूर्ति से जुड़े हैं। अगर बंदरगाहों और जहाजों पर हमले जारी रहे तो मध्य पूर्व और अफ्रीका के देशों में खाद्य संकट और गहरा सकता है।
भारत के लिए यह संकट दोहरी चुनौती है। एक तरफ भारत को अपनी घरेलू खाद्य सुरक्षा और कीमतों पर नजर रखनी होगी, दूसरी तरफ वैश्विक बाजार में अनाज की कीमतों में तेजी का असर आयात और खाद्य महंगाई पर पड़ सकता है। युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, उतना ही वैश्विक खाद्य आपूर्ति तंत्र पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक युद्ध के नाम पर बंदरगाहों, जहाजों और खाद्य आपूर्ति को निशाना बनाया जाएगा? रूस और यूक्रेन की लड़ाई का असर अब खेतों से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक दिखाई दे रहा है।
भारत सहित दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सामने चुनौती है कि खाद्य आपूर्ति को युद्ध की राजनीति से अलग रखा जाए। काला सागर में शांति और सुरक्षित निर्यात मार्ग बहाल करना अब सिर्फ रूस और यूक्रेन का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा का सवाल बन चुका है।
ये खबर भी पढ़ें—:


