यूक्रेन में रूस का खूनी हमला, 16 की मौत; भारत के सामने शांति और रणनीतिक संतुलन की बड़ी चुनौती

यूक्रेन युद्ध एक बार फिर भयावह स्तर पर पहुंच गया है। रूस के ड्रोन हमले में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के गृह शहर क्रिवी रिह के एक शॉपिंग सेंटर को निशाना बनाए जाने की खबर है। Reuters के मुताबिक हमले में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई और 130 से ज्यादा लोग घायल हुए।
जेलेंस्की ने इस हमले के बाद रूस के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का संकेत दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हमले की आलोचना तेज हुई है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कालास ने हमले की निंदा करते हुए इसे गंभीर हमला बताया और आगे प्रतिबंधों की चेतावनी दी।
भारत के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध सबसे कठिन कूटनीतिक मुद्दों में से एक बना हुआ है। भारत रूस के साथ लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा संबंध रखता है, जबकि पश्चिमी देशों के साथ भी उसके रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते लगातार महत्वपूर्ण हो रहे हैं।
भारत ने युद्ध के दौरान किसी सैन्य गुट का हिस्सा बनने से परहेज किया है और संवाद तथा कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत की है। नई दिल्ली के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि रूस के साथ अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखते हुए यूरोप और अमेरिका के साथ संबंधों का संतुलन भी कायम रखा जाए।
इस बीच युद्ध खत्म होने के संकेत कमजोर दिखाई दे रहे हैं। Reuters की ताजा यूक्रेन-रूस कवरेज में लगातार हमलों, ईंधन संकट और शांति प्रयासों के अटकने की तस्वीर सामने आती है।
भारत के लिए यह युद्ध सिर्फ दो देशों का संघर्ष नहीं है। इसके असर तेल, खाद्यान्न, रक्षा आपूर्ति, व्यापार और वैश्विक कूटनीति तक पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि यूक्रेन की हर बड़ी सैन्य कार्रवाई और रूस की हर जवाबी कार्रवाई पर नई दिल्ली की नजर बनी हुई है।
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